
पंचकोशी परिक्रमा
प्रयागराज. तीर्थराज प्रयाग की संगम की रेती पर दशकों से बंद पड़ी पंचकोसी पौराणिक परिक्रमा की परंपरा संगम तट से एक बार पुनः स्थापित हुई। तीर्थराज प्रयाग की धरती पर सदियों से विलुप्त हो चुकी पंचकोशी परिक्रमा के साथ भगवान शिव के द्वादश स्वरूप के दर्शन के लिए द्वादश माधव की परिक्रमा का शुभारंभ हो गया। त्रिवेणी के तट पर भगवती गंगा के सानिध्य में वैदिक मंत्रों के साथ पूजन, अर्चना और आरती के साथ मेला प्रशासन सहित संतों की टोली पंचकोसी परिक्रमा के लिए रवाना हुई । लंबे समय से पंचकोसी परिक्रमा को प्रारंभ करने की मांग चल रही थी । कुंभ की तैयारियों के दौरान संतों की मांग पर मेला प्रशासन ने पंचकोसी परिक्रमा के स्थानों को तय करके सुंदरीकरण का कार्य शुरू करवाया था। बता दें कि प्रयागराज के पूर्व दिशा में महर्षि दुर्वासा ऋषि का आश्रम तो पश्चिम में भारद्वाज ऋषि विराजमान है। उत्तर में पांडेश्वर महादेव स्थापित है और दक्षिण में पर्णास (पराशर) ऋषि का स्थान कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माना जाता है कि इन चारों बिंदुओं पर अगर प्रयागराज पहुंचकर दर्शन कर लिया गया तो प्रयाग की परिक्रमा पूरी हो जाती है ।
पंचकोसी परिक्रमा के साथ तीर्थराज प्रयाग के द्वादश (बारह) माधव परिक्रमा की भी शुरुआत हो गई है। गुरुवार को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी जूना अखाड़े के संरक्षक हरी गिरी सहित काशी सुमेरु पीठ शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती सहित कैलाश आनंद स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद की अगुवाई में पंचकोसी परिक्रमा प्रारंभ हुई। पंचकोसी परिक्रमा के संयोजक और जूना अखाड़े के संरक्षक हरि गिरि महाराज ने बताया कि तीन दिवसीय पंचकोसी परिक्रमा शुरू हुई है ।
परिक्रमा के पहले दिन गंगा पूजन के बाद चार सौ बरस बाद खुले अक्षय वट और सरस्वती कुंड का दर्शन करते हुए जल मार्ग द्वारा बनखंडी महादेव, तक्षक तीर्थ से मौज गिरी बाबा मंदिर में दर्शन करेंगे। बता दें कि मौज गिरी मंदिर (भृगु मुनि ) का स्थान माना जाता है। यहां भगवान् दत्तात्रेय ने अपनी तपस्या पूरी की थी। यहां से सूर्य टंकेश्वर महादेव मंदिर, चक्र माधव ,गदा माधव के दर्शन के साथ ही गंगा पार के क्षेत्र में पर्णास ऋषि के आश्रम क्षेत्र में स्थापित सोमेश्वर महादेव मंदिर का दर्शन कर प्रयागराज की पूर्व दिशा में स्थित दुर्वासा ऋषि के आश्रम में दर्शन करेंगे। जहां से शंख माधव के दर्शन के बाद पहले दिन का परिक्रमा पूरी होगी।
वहीं दूसरे दिन की परिक्रमा प्रयागराज के कोतवाल हनुमान जी महाराज के दर्शन से शुरू होगी। इसके बाद दत्तात्रेय मंदिर, चेतन पुरी, समाधि जूना अखाड़ा के साथ ही उत्तर दिशा में स्थित पांडेश्वर महादेव के दर्शन होंगे । साथ ही बक्शी बांध पर स्थित नाग वासुकी मंदिर द्शासुमेर मंदिर वेणी माधव मंदिर का दर्शन पूजन होगा साथी श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े में भजन कीर्तन के साथ दूसरे दिन की परिक्रमा को समाप्त करेंगे। तीसरे और अंतिम दिन दिन गंगाजल लेकर तट से निकलेंगे और शहर में स्थित भरद्वाज आश्रम में जाकर महर्षि भरद्वाज का अभिषेक करके परिक्रमा का समापन किया जाएगा ।
BY- PRASOON PANDEY
Updated on:
07 Feb 2019 03:56 pm
Published on:
07 Feb 2019 03:48 pm
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