13 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

आखिर आज मौत से ठन गई ,अटल बिहारी बाजपेयी के स्वास्थ के लिए संगम नगरी में शुरू हुई पूजा अर्चना

बीते चौबीस घंटे से बेहद नाजुक है पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी

2 min read
Google source verification
atal bihari vajpayee

atal bihari vajpayee health

इलाहाबाद:पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई कि हालत नाजुक बनी हुई है। देर रात से उनके गंभीर होने की सूचना के बाद देशभर में उनके स्वस्थ होने की कामना के लिए प्रार्थना और दुवाओ का दौर जारी है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के लिए संगम नगरी में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने संगम तट पर स्थित लेटे हुए हनुमान मंदिर पर हवन पूजन कर अटल बिहारी वाजपेई के स्वस्थ होने की कामना की।

गौरतलब है कि अटल बिहारी वाजपेई का तबियत बीते 24 घंटे बेहद गंभीर बनी हुई हैं।उनकी किडनी में संक्रमण के चलते बीते 11 जून को एम्स में भर्ती कराया गया था।जिसके बाद से वह घर वापस नही लौटे है।और इस बीच उनका स्वास्थ लगातार बिगड़ता जा रहा है।जिसकी खबर से उनके चाहने वाले उनके ठीक होने की दुआ कर रहे है।अटल बिहारी वाजपेई भाजपा के संस्थापक सदस्यों में रहे । जिन्होंने सत्ता में आकर कई बड़े कीर्ति मान स्थापित किये जो आज की राजनीत में सम्भव नही है ।

देश और दुनिया भर में अटल बिहारी वाजपेई को चाहने वालो की बड़ी तादात है।वो जितने प्रखर वक्ता रहे उतने ही मिलनसार व्यक्तित्व ने उन्हें बड़ा कद दिया।अटल बिहारी वाजपेई के राजनीतिक विरोध के बाद भी विपक्षी दलों ने भी हमेशा सम्मान किया। उनकी कविताएं उनके लेख और मंच से दिए गए उनके भाषण कभी कोई भूल नही सकता ।आज जब अटल जी जिन्दगी और मौत के बीच लड़ रहे है । ऐसे समय उनकी कविताएं उनके और करीब पंहुचा रही है ।

आज मौत से ठन ही गई

ठन गई मौत से ठन गई जूझने का मेरा कोई इरादा न था ।
रास्ता रोककर वह खड़ी हो, गई यू लगा जिंदगी से बड़ी हो गई ।

मौत की उम्र क्या दो पल भी नहीं जिंदगी सिलसिला आजकल कि नहीं ।
मैं जी भर जिया मैं मन से मरू लौट कर आऊंगा कूच से क्यों डरूं ।

तू दबे पांव चोरी.छिपे से न आ ।
सामने वार कर फिर मुझे आजमा ।

मौत से बेखबर जिंदगी का सफर शाम हर क्षण में ही रात बंसी का स्वर ।
बात ऐसी नहीं कि कोई गम नहीं दर्द अपने पराए का कुछ कम नहीं ।

प्यार इतना परायों से मुझको मिला ना अपनों से बाकी है कोई गिला ।
हर चुनौती से दो हाथ मैंने किये आंधियों में जलाए हैं बुझते दिए ।

आज झकझोरता तेज तूफान है नाव भंवरों की बांहों में मेहमान है ।
पार पाने को कायम मगर हौसला देख तेवर तूफां का तेवरी बन गई ।

मौत से ठन गई