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कमल खिलने से पहले फटा वरुण नाम का एटम बम

पोस्टरवार की जंग  में गांधी की आंधी

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Vikas Verma

Jun 11, 2016

varun gandhi poster

varun gandhi poster

इलाहाबाद से vikas bagi.

इलाहाबाद से गांधी परिवार का गहरा नाता है। जिस इलाहबाद में गांधी परिवार के युवराज नम्बर दो यानी वरुण गांधी की आंधी ने बीजेपी की के शीर्ष नेतृत्व को बेचैन कर दिया है। आलम यह है कि पार्टी को डर सता रहा है की कही दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में चर्चा का केंद्र बिंदु वरुण गांधी ही न बन जाएं। मोदी राज के दो साल के कार्यकाल के बखान के लिए बुलाई गयी राष्ट्रीय बैठक हंगामे की भेंट चढ़ने के आसार नजर आने से पार्टी पदाधिकारियों के शरीर का तापमान बढ़ता जा रहा है।
गौरतलब है उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के लिए इन दिनों बीजेपी में वरुण गांधी, आदित्यनाथ योगी के समर्थकों ने पोस्टरवार के साथ ही जुबानी जंग तेज कर दी है। इस बीच वरुण गांधी की प्रदेश में बढ़ती सक्रियता से पार्टी कमान इस कदर घबराया कि उनकी तमाम गतिविधियों पर ब्रेक लगाते हुए सांसद वरुण गांधी को उनके संसदीय क्षेत्र सुल्तानपुर तक सीमित रहने का हुक्म सुना दिया। इस बीच गृहमंत्री राजनाथ सिंह को लेकर आई चर्चाओं की बयार ने फ़िजा बदल दी। उधर राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से ठीक पहले आलाकमान का यह फैसला वरुण समर्थकों को जरा भी नहीं पचा। वरुण समर्थकों ने पूरे इलाहबाद शहर को pm मोदी और वरुण गांधी के पोस्टर से शहर को पाट दिया। आलम यह था कि तीन बार इलाहबाद से सांसद रह चुके बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य भी इक्का-दुक्का जगहों पर ही पोस्टर में हाथ जोड़ते नजर आ रहे।

धड़े में बंटा इलाहबाद, हंगामे के आसार

बीजेपी ने इलाहाबाद में दो दिवसीय बैठक का निर्णय तो ले लिया लेकिन अब आयोजकों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं। वरुण गांधी के नाम पर इलाहाबाद में पार्टी दो गुटों में बंटी दिख रही है। कार्यकारिणी की बैठक के दौरान मोदी की मौजूदगी में वरुण गांधी के लिए नारे लग सकते हैं।

नुकसान किसका होगा

वरुण गांधी को यूपी इलेक्शन में बीजेपी की तरफ से cm का चेहरा बनाने के लिए जिस तरह पार्टी के भीतर और बाहर जंग चल रही है, पार्टी के रणनीतिकार मानते हैं की नुकसान वरुण गांधी को ही होगा। पार्टी से बड़े वरुण नहीं है, और उनके द्वारा आलाकमान को लगातार जिस तरह नाराज किया जा रहा है उससे उनकी छवि बागी की बन रही है। वरुण लंबी रेस के घोड़े हैं और उन्हें अभी बहुत कुछ सीखना है।

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