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प्रयागराज: 33 साल से बर्खास्त चल रहा था बस कंडक्टर, हाईकोर्ट ने कर दिया बहाल, जाने पूरा मामला

बस कंडक्टर के 33 साल तक सेवा से बाहर रहने के बाद भी हाईकोर्ट ने 10 लाख रुपये देने का आदेश दिया है।

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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गबन के आरोप में फंसे एक बस कंडक्टर को 33 साल बाद बहाल कर दिया है। 27 सितंबर 1990 में गबन के आरोपी बर्खास्त बस कंडक्टर की बहाली का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की है कि बिना अपराध के बर्खास्तगी गलत है।

मेरठ के बस कंडक्टर का है मामला
यूपी के मेरठ जिले के बस कंडक्टर के बर्खास्तगी मामले में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति एस डी सिंह तथा न्यायमूर्ति शिवशंकर प्रसाद की खंडपीठ ने राज्य परिवहन निगम मेरठ के कंडक्टर माया शंकर की विशेष अपील को स्वीकार करते हुए सुनाया है।

याचिका करता कि सिर्फ 3 साल की ही सेवा थी शेष
हाईकोर्ट ने कहा कि उस समय बस कंडक्टर की महज 3 साल की सेवा ही शेष बची थी, तभी याची को बर्खास्त कर दिया गया। अब वह रिटायर हो चुका है। ऐसे में निलंबन व बर्खास्तगी की अवधि के वेतन मद में उसे 10 लाख रुपये एक मुश्त रकम देने तथा याची को सेवा में नियमित मानते हुए तीन माह में सेवानिवृत्ति परिलाभों की गणना कर भुगतान करने का निर्देश दिया है।

बिल पर ओवरराइटिंग करने का मामला
याची पर 1989 में बिल पर ओवर राइटिंग कर 6850 रुपये गबन कर परिवहन निगम को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया था। बिल पर कटिंग कर मुजफ्फरनगर को मेरठ लिखने के आधार पर दोषी मानते हुए बर्खास्त कर दिया गया था । जिस पर याचिका करता ने हाई कोर्ट में चुनौती दी।