
भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
इलाहाबाद भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद दो दिवसीय दौरे पर संगम नगरी पहुंच रहे हैं।भारत के प्रथम नागरिक के तौर पर प्रयाग में उनका प्रथम आगमन है। शिक्षा और धर्म की यह धरती अपने महामहिम के स्वागत के लिए अपनी सभी तैयारियां पूरी कर चुकी है। महामहिम राष्ट्रपति का प्रयाग के प्रथम आगमन पर उनका भव्य स्वागत करने में प्रयाग कोई भी कसर नहीं छोड़ना चाहता। राष्ट्रपति कोविंद उत्तर प्रदेश के पहले और देश के 14वें राष्ट्रपति हैं। महामहिम राष्ट्रपति अपने दो दिवसीय दौरे के पहले दिन मोतीलाल नेहरू प्रौद्योगिकी संस्थान के दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि हिस्सा लेंगे।तो वहीं दूसरे दिन न्याय के मंदिर एशिया के सबसे बड़े हाईकोर्ट में न्याय ग्राम टाउनशिप की आधारशिला रखेंगे।।इस दौरान महामहिम राष्ट्रपति के साथ उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी होंगे।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद करंगे संगम स्नान लेंगे माँ गंगा का आशीर्वादमहामहिम राष्ट्रपति अपने दूसरे दिन के कार्यक्रमों की शुरुआत गंगा यमुना सरस्वती के पावन संगम के तट से करेंगे।महामहिम संगम जाकर त्रिवेणी की अविरल धारा की पूजा अर्चना कर पुण्य लाभ लेंगे। महामहिम की संगम तट पर पूजा अर्चना करने के बाद गंगा की गोद में स्थित नगर कोतवाल लेटे हुए हनुमान जी महाराज के मंदिर में दर्शन कर विधि विधान से पूजन करेंगे। संगम तट स्थित हनुमान मंदिर में महामहिम राष्ट्रपति का स्वागत मंदिर के महंत नरेंद्र गिरि महाराज करेंगे जहां पर 51 बटुक बालको द्वारा महामहिम का वैदिक मंत्रोच्चारण से स्वागत होगा। महामहिम हनुमान मंदिर की परिक्रमा के साथ दुनिया में प्रयाग मात्र में लेटे हुए हनुमान जी की मूर्ति का दर्शन करेंगे।जानकारों की माने तो राष्ट्रपति होने से पहले भी जब जब महामहिम प्रयाग आये है।उन्होने संगम स्नान किया है।
मंदिर के महंत नरेंद्र गिरी के अनुसार महामहिम के स्वागत में मंदिर परिसर में भव्य पूजा पाठ का आयोजन किया गया है। और राष्ट्र के प्रथम नागरिक के तौर पर उनका स्वागत व सत्कार परिसर में होगा। राष्ट्रपति के आगमन को लेकर मंदिर की साज सज्जा और मूर्ति का भव्य श्रृंगार किया जाएगा।इस दौरान महामहिम को महंत द्वारा धार्मिक संतो और मंदिर की पौराणिकता की जानकारी दी जाएगी। राष्ट्रपति के प्रयाग दौरे पर संगम तट पर जाना।भारतीय संस्कृति और उसकी धार्मिक परंपरा को और बल मिलेगा। बता दे कि आज़द भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद शंकर दयाल शर्मा और के आर नारायणन ने संगम तट पर आकर पूजा अर्चना किया है।तो वही महामहिम कोविंद के संगम आगमन के बाद एक बार फिर कई दशक बाद रायसीना हिल्स के स्वर्णिम दस्तावेजों में संगम नगरी की गौरव गाथा लिखी जाएगी।
डॉ राजेंद्र प्रसाद माघ मास में महीने भर संगम की रेती पर कल्पवास करते थे।तो वहीं राष्ट्रपति बनने के बाद शंकर दयाल शर्मा संगम तट पर आकर त्रिवेणी की पूजा अर्चना की थी।और तत्कालीन राष्ट्रपति के आर नारायण ने भी गंगा दर्शन और गंगा आरती में हिस्सा लिया था।महामहिम के कार्यक्रम को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरीके से सतर्क है। किसी भी तरह की वह चूक नहीं करना चाहता महामहीम के संगम जाने वाले रास्ते पर चप्पे चप्पे पर फोर्स तैनात की जा रही है।सर्किट हाउस से संगम घाट तक रूट डायवर्जन किया गया है। इस रास्ते पर किसी भी तरह के आवागमन को जिला प्रशासन अनुमति नहीं देगा राष्ट्रपति के आने की घंटे पहले से लेकर और उनके वापस लौटने तक सर्किट हाउस से संगम तक का मार्ग पूरी तरीके से प्रतिबंधित किया जा रहा है।
Published on:
14 Dec 2017 01:48 am
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