
Radhe maa
इलाहाबाद. मुंबई की चर्चित महिला संत राधे मां प्रयाग में होने वाले अर्धकुंभ मेले में शाही जुलूस निकालकर शाही स्नान के लिए आएंगी। जूना अखाड़े ने न सिर्फ राधे मां का निलंबन रद्द कर उन्हें बहाल कर उनकी महामंडलेश्वर की पदवी भी वापस कर दी है। राधे मां कुंभ मेले में शाही स्नान के लिए शामिल होंगी। राधे मां को वर्ष 2013 में हरिद्वार के जूना अखाड़े ने आधी रात में महामंडलेश्वर पद से नवाजा था। उन्हें यह पद स्वयं जूनापीठाधीश्वर अवधेशानंद गिरि ने प्रदान किया था।
राधे मां के चरित्र पर उठा था सवाल
सवेरे जैसे ही संत जगत में राधे मां को महामंडलेश्वर बनाने की सूचना मिली, हंगामा हो गया। देशभर से अखाड़ों में जूना अखाड़े के इस फैसले का विरोध शुरू हो गया। अधिकांश अखाड़ों का कहना था कि जिस महिला के चरित्र पर सवाल उठ रहे हों, उसे महामंडलेश्वर नहीं बनाया जा सकता। राधे मां को वर्ष 2013 में महामंडलेश्वर बनाने के तत्काल बाद निलंबित कर दिया गया था। उन्होंने हरिद्वार में ही यह पदवी प्राप्त की थी और हरिद्वार से ही जूना पीठाधीश्वर अवधेशानंद गिरि ने उनका निलंबन किया था।
कौन है राधे मां
राधे मां का जन्म पंजाब के गुरदासपुर जिले के एक सिख परिवार में हुआ था। इनकी शादी पंजाब के ही रहने वाले व्यापारी सरदार मोहन सिंह से हुई है। शादी के बाद एक महंत से राधे मां की मुलाकात हुई, जिसके बाद से ही उन्होंने आध्यात्मिक जीवन अपनाया। कुछ समय बाद वह मुंबई आ गई और राधे मां के नाम से मशहूर हो गई। राधे मां के खिलाफ मुंबई, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश और गुजरात में अलग-अलग केस दर्ज हो चुके हैं। दहेज मामले में मुंबई पुलिस उनसे पूछताछ भी कर चुकी है। हालांकि, तमाम आरोपों को राधे मां ने गलत बताया है।
Published on:
05 Jan 2019 05:00 pm
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