
समाजवादी पार्टी को उसी के गढ़ में सेक्युलर मोर्चा ने दिया बड़ा झटका, शिवपाल यादव के साथ हुए दर्जनों प्रधान
प्रयागराज. जिले के यमुनापार क्षेत्र में समाजवादी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। समाजवादी पार्टी के नेता व यमुनापार प्रधान संघ से अध्यक्ष चाका ब्लाक के धनुहा ग्राम प्रधान दिलीप तिवारी ने समाजवादी पार्टी छोड़कर सेक्युलर मोर्चा का दामन थाम लिया। सेक्युलर मोर्चा इलाहाबाद मंडल प्रभारी लल्लन राय ने कचेहरी जगराम चौराहा के पास स्थित अपने आवास पर प्रधान संघ के अध्यक्ष दिलीप तिवारी व यमुनापार के दर्जनों प्रधान को माला पहना कर सेक्युलर मोर्चा में शामिल कराया।
सेक्युलर मोर्चा इलाहाबाद मंडल प्रभारी लल्लन राय ने कहा कि यमुनापार प्रधान संघ के अध्यक्ष दिलीप तिवारी के सेक्युलर मोर्चा में आने से मजबूती मिली है। उन्होंने कहा यमुनापार में प्रधान संघ के 69 प्रधान है। आज दर्जनों प्रधानों ने जहां सेक्युलर मोर्चा का दामन थाम लिया, वहीं बाकी प्रधाम भी शामिल होने का मन बना चुके हैं। जिन्हें यमुनापार क्षेत्र में सेक्युलर मोर्चा जल्द एक आयोजन कर मोर्चे में शामिल कराएगा। उन्होंने कहा सेक्युलर मोर्च हर धर्म, जाति, वर्ग को साथ लेकर चलने में विश्वास रखता है। यहां पर सभी को एक समान मौका दिया जाएगा। आखिर में उन्होंने कहा सेक्युलर मोर्चा अब एक बड़ी ताकत के रूप में उभर रहा है। जिसका असर आगामी लोकसभा चुनाव में देखने को मिलेगा।
वहीं यमुनापार प्रधान संघ के अध्यक्ष दिलीप तिवारी ने दर्जन भर प्रधानों के साथ सेक्युलर मोर्च ज्वाइन करने के सावाल पर कहा कि जमीनी स्तर का कार्यकर्ता ही पार्टी को असल मजबूती देता है। समाजवादी पार्टी को क्षेत्र में मजबूती देने के लिए कार्यकर्ताओं ने अपना खून पसीना बहाया है। लेकिन आज समाजवादी पार्टी छोड़ कर उन्होंने सेक्युलर मोर्चा में जाने का मन बनाया तो इसकी वजह शिवपाल यादव का कार्यकर्ताओं के प्रति जुड़ाव और उनके लिए हर वक्त सुलभ उपलब्ध होना है।
नब्बे के दशक से यमुनापार माना जाता है सपा का गढ़
गौरतलब है कि यमुनापार नब्बे के दसक से समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता है। बता दें कि समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता राज्यसभा सांसद रेवती रमण इसी क्षेत्र से आते है। राज्य सभा सांसद रेवती रमण का इस क्षेत्र में खासा प्रभाव माना जाता है। वह यहां से आठ बार विधायक व दो बार सांसद रह चुके है। हालांकि 2014 के लोक सभा चुनाव व मोदी लहर में उन्होंने अपनी सीट गवां दी थी जिसके बाद उन्हें समाजवादी पार्टी ने राज्य सभा भेज दिया। बावजूद इसके 2017 में हुए विधान सभा चुनाव में इनके बेटे उज्वल रमण ने एक बार फिर कड़ी टक्कर देते हुए समाजवादी पार्टी को करछना सीट से बड़ी जीत दिलाने में सफल रहे थे। जबकि इलाहाबाद में अन्य सभी सीटों पर समाजवादी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था। करछना विधायक उज्वल रमण की जीत ने एक बार फिर बता दिया था कि यमुनापार समाजवादी पार्टी का गढ़ है। वहीं अब शिवपाल यादव के सेक्युलर मोर्चा बनाने के बाद यमुनापार से प्रधान संघ के अध्यक्ष और राज्यसभा सासंद रेवती रमण के करीबी माने जाने वाले दर्जनों प्रधान का समाजवादी पार्टी छोड़ना, पार्टी को आगामी चुनाव में बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है।
Published on:
22 Oct 2018 03:37 pm
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