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साहित्य जगत का एक और सितारा हुआ देदीप्यमान, नहीं रहे वरिष्ठ कथाकार दूधनाथ सिंह

निजी अस्पताल में प्रोस्टेट कैंसर के इलाज के दौरान हुई मृत्यु

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Story writer Dudhnath Singh

कथाकार दूधनाथ सिंह

इलाहाबाद. भारत भारती सम्मान से सम्मानित हिन्दी के वरिष्ठ कथाकार दूधनाथ सिंह अब इस दुनिया में नहीं रहे। गुरूवार रात करीब 12 बजे इलाहाबाद स्थित एक निजी अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गयी। वह 81 वर्ष के थे। उनकी मौत के साथ ही साहित्य जगत का एक और सितारा देदीप्यमान हो गया। वरिष्ठ कथाकार दूधनाथ सिंह की मृत्यु से साहित्य जगत को बड़ी क्षति हुई है।

कथाकार दूधनाथ सिंह का पिछले करीब एक साल से प्रोस्टेट कैंसर का इलाज चल रहा था। उनकी तबियत बिगड़ने पर 4 जनवरी को उन्हें टैगोर टाउन स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पहले उन्हें अस्पताल मंें उन्हें आईसीयू में रखा गया था। तीन डायलिसिस के बाद उन्हें रविवार को आईसीयू से निकाल कर प्राइवेट रूम में रखा गया था। बुधवार रात अचानक उनकी ज्यादा तबियत खराब हुई।

इसके बाद उन्हें फिर आईसीयू में वेंटिलेटर पर रखा गया। बावजूद इसके उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ और गुरूवार रात करीब 12 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनकी मृत्यु के बाद उन्हें रात को ही झूंसी स्थित आवास पर ले जाया गया। दूधनाथ सिंह अपने पीछे दो बेटे और एक बेटी को छोड़ गए। आज शुक्रवार दोपहर 2 बजे रसूलाबाद घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

साहित्य के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित

वरिष्ठ कथाकर दूधनाथ सिंह ने अपने रचनाओं से सबका दिल जीता। रचनाकार दूधनाथ सिंह 1994 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त होने के बाद से निरंतर रचनाओं में डूबे रहे। उनकी खूबसूरत रचनाओं के लिए उत्तर प्रदेश के सर्वोच्च साहित्यक सम्मान भारत-भारती और मध्य प्रदेश सरकार के शिखर सम्मान मैथिलीशरण गुप्त सम्मान सहित कई अन्य सम्मान से नवाजा जा चुका है।

उनकी प्रमुख रचनाओं में आखिरी कलाम, यमगाथा, निष्कासन, कथा संग्रह, और भी आदमी हैं, माई का शोक गीत, सपाट चेहरे वाला आदमी, धर्मक्षेत्रे-कुरुक्षेत्रे, जलमुर्गियों का शिकार और निरालाः आत्महंता आस्था जैसी रचनाएं शामिल हैं।

किया नेत्रदान का संकल्प पूरा

वरिष्ठ कथाकार दूधनाथ सिंह इस दुनिया को छोड़ कर जरूर चले गए लेकिन जाते जाते उन्होंने नेत्रदान का संकल्प पूरा कर किसी की दुनिया में रोशन करने का भी काम किया है। गुरूवार रात उनकी मौत के बाद डाॅ0 राजेश सहित मनोहर दास नेत्र चिकित्सालय के डाॅक्टरों की टीम मौके पर पहुंची। इस दौरान उन्होंने दूधनाथ सिंह के संकल्प को पूरा करते हुए नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की।