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बाल यौन शोषण के आरोपी शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जाएंगे हाईकोर्ट, गिरफ्तारी से पहले ही दायर करेंगे जमानत याचिका

Shankaracharya Avimukteshwarananda: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने FIR को साजिश बताया और हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं। पुलिस मामले की जांच तेजी से कर रही है।

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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जाएंगे हाईकोर्ट

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जाएंगे हाईकोर्ट

Shankaracharya Avimukteshwarananda Sexual Abuse Case: यूपी के प्रयागराज में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर बाल यौन शोषण के गंभीर आरोप लगे हैं। तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने इन आरोपों को उठाया। दो कथित नाबालिग पीड़ितों की ओर से झूंसी थाने में तहरीर दी गई थी। जब पुलिस ने FIR दर्ज नहीं की, तो 28 जनवरी को आशुतोष महाराज ने जिला कोर्ट में धारा 173(4) के तहत अर्जी दाखिल की। प्रयागराज की एडीजे रेप एंड पॉक्सो स्पेशल कोर्ट के जज विनोद कुमार चौरसिया ने 21 फरवरी को अर्जी मंजूर की और पुलिस को FIR दर्ज करने का आदेश दिया।

FIR में लगाई गई धाराएं

कोर्ट के आदेश पर झूंसी थाने में पुलिस ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ FIR दर्ज की। इसमें पॉक्सो एक्ट की धारा 3, 4(2), 5, 6, 16, 17 और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 351(2) समेत अन्य गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। मामला 13 जनवरी 2025 से 15 फरवरी 2026 के बीच का बताया गया है। आरोप है कि माघ मेले के दौरान आश्रम में नाबालिग बच्चों के साथ यौन शोषण हुआ। पुलिस ने रविवार को घटनास्थल का निरीक्षण किया और नक्शा तैयार किया। आगे जांच के लिए वाराणसी जाकर स्वामी और शिष्य से पूछताछ की जाएगी।

स्वामी की प्रतिक्रिया और साजिश का दावा

FIR दर्ज होने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे पूरी तरह साजिश बताया। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई उनके खिलाफ धार्मिक और राजनीतिक दुश्मनी से की गई है। स्वामी ने शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी पर निशाना साधा और कहा कि वे खुद हिस्ट्रीशीटर हैं। कौशांबी के कंगला थाने में उनकी तस्वीर लगी हुई है। स्वामी ने कहा कि वे डरने वाले नहीं हैं और सच सामने आएगा।

हाईकोर्ट में याचिका और जमानत की तैयारी

अब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले हैं। वे झूंसी थाने में दर्ज FIR को चुनौती देंगे। साथ ही गिरफ्तारी से बचने के लिए जमानत) की अर्जी भी दाखिल कर सकते हैं। यह कदम उनके कानूनी बचाव का हिस्सा माना जा रहा है। दूसरी तरफ पुलिस मामले की जांच तेजी से कर रही है। जांच के नतीजे आने के बाद स्थिति साफ होगी। स्वामी के समर्थक इसे झूठा आरोप बता रहे हैं, जबकि शिकायतकर्ता न्याय की मांग कर रहे हैं। समाज में ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई की जरूरत है।