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बाल यौन शोषण मामले में पॉक्सो के तहत FIR दर्ज होने के बाद…स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का बयान आया सामने

पॉक्सो के तहत FIR दर्ज होने के बाद…स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का बयान सामने आया है, उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया में पूर्ण विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि सच्चाई जांच के माध्यम से सामने आएगी।

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Avimukteshwaranand Saraswati

फोटो में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (इमेज सोर्स: आईएएनएस)

Swami Avimukteshwaranand: बाल यौन शोषण के गंभीर आरोपों पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ POCSO Act के तहत केस दर्ज होने के बाद मामला जोर पकड़ लिया है। अदालत के आदेश के कुछ घंटों बाद ही स्वामी का बयान सामने आया, जिसमें उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को पूरी तरह झूठा बताया और कहा कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। स्वामी का कहना है कि FIR दर्ज होना प्रक्रिया का हिस्सा है और अब जांच ही असली सच सामने लाएगी।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का दावा

स्वामी ने शिकायतकर्ता की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाया और दावा किया कि जिसने आरोप लगाए हैं, वह खुद आपराधिक पृष्ठभूमि वाला व्यक्ति है। उन्होंने कहा, “जिसने मेरे खिलाफ आरोप लगाए हैं, वह खुद इतिहास में अपराध दर्ज होने वाला व्यक्ति है। उसका रिकॉर्ड इसे साबित करता है। उसका मुख्य काम लोगों के खिलाफ झूठे मामले दर्ज करके पैसे वसूलना है।”

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता ने जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य का शिष्य होने का दावा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि गाय संरक्षण के लिए उठाई गई आवाजों को दबाने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने न्यायपालिका में विश्वास जताया और कहा, “हम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरह नहीं हैं। हम चाहते हैं कि हमारे खिलाफ मामले वापस लिए जाएं। हम बिना डर के बोलते रहेंगे और हमें विश्वास है कि सच्चाई विजयी होगी।”

उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी ने भी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह शंकराचार्य परंपरा को बदनाम करने की साजिश है। उन्होंने कहा, “यह कानूनी प्रक्रिया है। हम चाहते हैं कि अदालत हमारी बात पूरी तरह सुने और सही तथ्यों पर जल्द विचार करे।”

जज ने शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज करने का दिया था आदेश

बता दें विशेष पॉक्सो जज विनोद कुमार चौरसिया ने प्रयागराज के झूंसी थाने को आदेश दिया था कि आशुतोष ब्रह्मचारी की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की जाए। अदालत ने यह फैसला तब लिया, जब उसने प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार द्वारा दी गई प्रारंभिक जांच रिपोर्ट देखी। रिपोर्ट की समीक्षा के बाद अदालत ने आगे की जांच जारी रखने के निर्देश दिए। यह पूरा मामला POCSO Act के तहत नाबालिगों के यौन शोषण से जुड़े आरोपों से संबंधित है।

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