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यौन शोषण मामले में कोर्ट का अहम फैसला, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को बड़ी राहत, गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक

Prayagraj News: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को इलाहाबाद हाईकोर्ट से यौन शोषण मामले में बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने चार्जशीट दाखिल होने तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए दोनों पक्षों को मीडिया में बयानबाज़ी से बचने के निर्देश दिए हैं।

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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को बड़ी राहत | Image - X/@jyotirmathah

Shankaracharya Bail HC: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को बड़ी राहत देते हुए उनकी जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। बुधवार को सुनाए गए इस फैसले में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक मामले में चार्जशीट दाखिल नहीं हो जाती, तब तक उनकी गिरफ्तारी नहीं की जाएगी। यह आदेश जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ द्वारा दोपहर करीब 3:45 बजे सुनाया गया। कोर्ट के इस फैसले से फिलहाल शंकराचार्य को कानूनी राहत मिल गई है, हालांकि मामले की जांच जारी रहेगी।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शंकराचार्य और शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज दोनों को मामले को लेकर अनावश्यक बयानबाज़ी से बचने की सलाह दी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि दोनों पक्ष मीडिया में इंटरव्यू देने से भी परहेज़ करें, ताकि मामले की निष्पक्षता और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। अदालत का यह रुख इस बात को दर्शाता है कि वह इस संवेदनशील मामले को लेकर संतुलित और नियंत्रित माहौल बनाए रखना चाहती है।

सुनवाई की प्रक्रिया और पक्षकारों की मौजूदगी

सुनवाई से पहले ही शंकराचार्य के वकील अदालत में उपस्थित हो गए थे, जबकि शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज ने ऑनलाइन माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इससे पहले 27 फरवरी को हाईकोर्ट ने इस मामले में सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था और तब तक गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। इसके बाद 17 मार्च को आशुतोष महाराज की ओर से 883 पन्नों का विस्तृत जवाब दाखिल किया गया, जिसमें जमानत का विरोध करते हुए तत्काल गिरफ्तारी की मांग की गई थी।

पहले भी मिल चुकी थी राहत

गौरतलब है कि 27 फरवरी को ही हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए शंकराचार्य की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। उस समय कोर्ट ने कहा था कि अंतिम निर्णय आने तक उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, लेकिन उन्हें जांच में पूरा सहयोग करना होगा। इस दौरान शंकराचार्य की ओर से वरिष्ठ वकील पीएन मिश्रा ने पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल और शिकायतकर्ता की ओर से वकील रीना सिंह ने दलीलें पेश की थीं।

FIR दर्ज होने की पूरी कहानी

यह मामला तब सामने आया जब तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने 8 फरवरी को जिला अदालत में याचिका दाखिल की। इसके बाद रेप और पॉक्सो विशेष अदालत के जज विनोद कुमार चौरसिया के आदेश पर 21 फरवरी को झूंसी थाने में शंकराचार्य के खिलाफ बटुकों के यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज किया गया। इस FIR के बाद मामला तेजी से सुर्खियों में आया और अब हाईकोर्ट के फैसले ने इसमें एक नया मोड़ ला दिया है।

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