हाईकोर्ट के इतिहास में पहली बार हुआ जब शनिवार को केवल फैसले के लिए चीफ जस्टिस की कोर्ट खुली। मामले की सुनवायी के लिए गठित पूर्णपीठ में चीफ जस्टिस डॉ.डीवाई चंद्रचूड, जस्टिस दिलीप गुप्ता व जस्टिस यशवंत वर्मा शामिल रहे। पीठ चार सितम्बर से इस मामले की सुनवायी कर रही थी। प्रदेश में 1.71 लाख शिक्षा मित्र हैं। इनकी नियुक्ति बिना किसी परीक्षा के ग्राम पंचायत स्तर पर मेरिट के आधार पर की गई थी। 2009 में तत्कालीन बसपा सरकार ने दो वर्षीय प्रशिक्षण की अनुमति नेशनल काउंसिल फॅार टीचर्स एजुकेशन (एनसीटीई)से ली। इसी अनुमति के आधार पर इन्हें दूरस्थशिक्षा के अंतर्गत दो वर्ष का बीटीसी प्रशिक्षण दिया गया।
2012 में सत्ता में आई सपा सरकार ने इन्हें सहायक अध्यापक पद पर समायोजित करने का निर्णय लिया। पहले चरण में जून 2014 में 58,800 शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक के पद पर समायोजन हो गया। दूसरे चरण में जून में 2015 में 73,000 शिक्षा मित्र सहायक अध्यापक बनाए गये। तीसरे चरण का समायोजन होने से पहले ही मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचाया।
बीटीसी प्रशिक्षु शिवम राजन सहित कई युवाओं ने समायोजन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा मित्रों के समायोजन पर रोक लगाते हुए हाईकोर्ट से विचाराधीन याचिकाओं पर अन्तिम निर्णय लेने को कहा। जिस पर यह पूर्णपीठ सुनवाई कर रही थी।