13 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

swami vivekananda birth anniversary: माघ मेला से विवेकानंद का है गहरा नाता, यहीं से मिला था वैदिक दर्शन

25 साल की उम्र में विवेकानंद जी ने लिया था सन्यास

2 min read
Google source verification
Swami vivekananda

Swami vivekananda

इलाहाबाद. वेदों के ज्ञाता और महान दार्शनिक स्‍वामी विवेकानंद न सिर्फ भारत के उत्‍थान के लिए काम किया बल्‍कि लोगों को जीवन जीने की कला सिखाने वाले थे। साल 1984 में भारत सरकार ने हर साल 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद जयंती के तौर पर मनाने की घोषणा की थी। विश्व भर के युवाओं के पथ प्रदर्शक और पूरी दुनिया में भारतीय संस्कृति की पताका फहराने वाले स्वामी विवेकानंद का प्रयाग से गहरा नाता रहा है। उन्होंने माघ मेला के दौरान संगम की रेती पर न केवल गहरी साधना की थी बल्कि वैदिक दर्शक की प्राप्ति भी उन्हें यहीं से हुई थी।

25 साल की उम्र में विवेकानंद जी ने लिया था सन्यास
साल 1984 में भारत सरकार ने हर साल 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद जयंती के तौर पर मनाने की घोषणा की थी। 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता में जन्में विवेकानंद जी का बचपन का नाम नरेंद्रनाथ दत्त था। उनके पिता कलकत्ता हाइकोर्ट में वकील और माता गृहिणी थीं। विवेकानंद के दादा दुर्गाचरण दत्त संस्कृत और फारसी के ज्ञाता थे। माना जाता है कि उन्हीं का असर था जो नरेंद्रनाथ आगे चलकर स्वामी विवेकानंद बन सके। 25 साल की उम्र में विवेकानंद जी ने सन्यास ले लिया और स्वामी रामकृष्ण परमहंस के संपर्क में आ गए। विवेकानंद उनके विचारों से बहुत प्रभावित थे। स्वामी रामकृष्ण परमहंस की मृत्यु के बाद उन्होंने पूरे देश में रामकृष्ण मठ बनाया। स्वामी जी का देहांत महज़ 39 साल की उम्र में 4 जुलाइ 1902 को हो गया था।


31 दिसंबर 1889 को स्वामी अपने बीमार गुरु भाई स्वामी योगानंद को देखने आए थे इलाहाबाद
इलाहाबाद प्रवास के दौरान ही रामकृष्ण मठ की स्थापना को लेकर उन्होंने सपना देखा था, जिसे बाद में उनके गुरु भाई ने साकार किया था। यूं तो स्वामी विवेकानंद का प्रयाग आगमन केवल आध्यात्मिक साधना का एक अवसर माना जाता रहा है लेकिन इस प्रवास का मुख्य कारण उन्होंने अपनी आत्मकथा में स्पष्ट किया था। 31 दिसंबर 1889 को स्वामी अपने बीमार गुरु भाई स्वामी योगानंद को देखने आए थे। प्रयाग की माटी ने उनका मन इस कदर मोहा कि उन्होंने तब चल रहे माघ मेला का पूरा लाभ उठाया। ध्यान और साधना के लिए उन्होंने संगम की रेती को चुना था। उन्होंने प्रयाग में ही सनातन धर्म और परंपरा का अध्ययन संतों के सानिध्य में रहकर किया था।


प्रयाग से ही रामकृष्ण मिशन की विचारधारा का प्रचार-प्रसार किया था शुरू
वैदिक दर्शन की खोज और प्राप्ति के बाद उन्होंने यहां के युवाओं को खासकर प्रेरित किया था। यहां के धर्म और अध्यात्म की छाप विवेकानंद पर ऐसे पड़ी कि उन्होंने यहीं से रामकृष्ण मिशन की विचारधारा का प्रचार-प्रसार शुरू किया था। बाद में रामकृष्ण मिशन के पांच केंद्रों की जब स्थापना की गई तो उसमें एक इलाहाबाद भी रहा है।

उनके गुरु भाई स्वामी योगानंद ने सन् 1910 में शहर के मुट्ठीगंज मुहल्ले में आर्यकन्या इंटर और डिग्री कॉलेज के पास मुख्य मार्ग पर रामकृष्ण मठ, रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम की स्थापना की थी। यह केंद्र आज भी स्वामी विवेकानंद के विचारों को जन- जन तक पहुंचाने में सार्थक भूमिका का निर्वाह कर रहा है।