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प्रयागराज प्रशासन को शंकराचार्य की तरफ से जवाब 24 घंटे के अंदर नोटिस वापस ले, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का दिया हवाला

प्रयागराज माघ मेला नोटिस विवाद में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए नोटिस वापस न लेने पर अवमानना व मानहानि की चेतावनी दी गई है।

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शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती फोटो सोर्स 1008.Guru X अकाउंट

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती फोटो सोर्स 1008.Guru X अकाउंट

Intro: प्रयागराज माघ मेला प्राधिकरण और ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के बीच नोटिस को लेकर विवाद गहरा गया है। मेला प्रशासन की ओर से भेजे गए नोटिस के जवाब में शंकराचार्य पक्ष ने कानूनी नोटिस जारी कर 24 घंटे में नोटिस वापस लेने की चेतावनी दी है।

प्रयागराज माघ मेला प्राधिकरण द्वारा ज्योतिष मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को नोटिस भेजे जाने के बाद अब मामला कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। शंकराचार्य की ओर से उनके अधिवक्ता अंजनी कुमार मिश्र ने मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को लीगल नोटिस भेजते हुए 24 घंटे के भीतर जवाब देने की मांग की है।

मामला सुप्रीम कोर्ट में विचार अधीन होने के कारण नोटिस अवमानना की श्रेणी में आता

नोटिस में कहा गया है कि मेला प्रशासन द्वारा “शंकराचार्य” लिखने पर आपत्ति जताना न केवल अपमानजनक है। बल्कि सुप्रीम कोर्ट की अवमानना की श्रेणी में भी आता है। अधिवक्ता की ओर से जारी आठ पन्नों के कानूनी नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि शंकराचार्य पद को लेकर पूरा मामला पहले से ही सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में किसी प्रशासनिक संस्था का हस्तक्षेप करना न्यायालय की प्रक्रिया में दखल माना जाएगा। नोटिस में यह भी कहा गया है कि यदि मेला प्रशासन ने अपना नोटिस 24 घंटे के भीतर वापस नहीं लिया। तो मानहानि और अवमानना की कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी। यह कानूनी नोटिस मेला प्राधिकरण के कार्यालय में विधिवत रिसीव कराया गया है। इसके अलावा दफ्तर के बाहर नोटिस चस्पा किया गया और ईमेल के माध्यम से भी इसकी प्रति प्रशासन को भेजी गई है।

प्रशासन ने 14 अक्टूबर 2022 के आदेश का हवाला देकर जारी किया नोटिस

वहीं, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की ओर से मेला प्राधिकरण द्वारा मांगे गए साक्ष्यों का जवाब भी भेज दिया गया है। अपने आठ पन्नों के जवाब में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि वही ज्योतिष पीठ के वैध शंकराचार्य हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि जिस सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर प्रशासन ने नोटिस जारी किया है। वह आदेश 14 अक्टूबर 2022 का है।

सुप्रीमकोर्ट में मामला पहुंचने से पहले हुआपट्टाभिषेक

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के अनुसार, शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के ब्रह्मलीन होने के अगले ही दिन 12 सितंबर 2022 को उनका विधिवत पट्टाभिषेक हो चुका था। यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट में मामला जाने से पहले पूरी हो चुकी थी। ऐसे में बाद में आए किसी आदेश को उनके पट्टाभिषेक पर लागू नहीं किया जा सकता। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब मेला प्रशासन की ओर से दिए जाने वाले जवाब पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।