18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

69000 शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड भाजपा नेता चन्द्रमा सिंह यादव गिरफ्तार

चन्द्रमा सिंह यादव यूपी सरकार के कद्दावर कैबिनेट मंत्री का रह चुके हैं प्रतिनिधि भाजपा किसान मोर्चा में प्रदेश कार्य समिति जैसे पदों पर भी रहे हैं आरोपी चन्द्रमा यादव एसटीएफ ने किया गिरफ्तार, फर्जीवाड़ा केस में अभी तीन और आरोपियों की तलाश

2 min read
Google source verification
chandrama singh yadav

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

प्रयागराज. उत्तर प्रदेश में 69000 शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़े के मास्टरमाइंड भाजपा नेता चन्द्रमा सिंह यादव काे गिरफ्तार कर लिया गया है। चन्द्रमा को यूपी एसटीएफ ने प्रयागराज से गिरफ्तार किया। उनपर अपने काॅलेज में बनाए गए परीक्षा सेंटर से फर्जीवाड़ा करने वाले गिरोह को पेपर उपलब्ध कराने का आरोप है। चन्द्रमा सूबे के एक कद्दावर कैबिनेट मंत्री के प्रतिनिधि भी रह चुके हैं। वह भारतीय जनता पार्टी के किसान मोर्चा में प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य और पार्टी की महानगर इकाई के उपाध्यक्ष भी रहे हैं। शिक्षक भर्ती में फर्जीवाड़ा करने में चन्द्रमा यादव का अहम रोल बतााय जाता है।

चन्द्रमा यादव इसके पहले टीईटी भर्ती में हुई गड़बड़ी के मामले में भी गिरफ्तार किये जा चुके हैं। जून के पहले ही वह उस मामले में जेल से छूटकर आए, लेकिन तब तक प्रयागराज पुलिस ने 69000 शिक्षकों की भर्ती में फर्जीवाड़ा का भांडाफोड़ करते हुए गिरोह का पर्दाफाश कर दिया। इस मामले में गिरोह के सरगना डाॅ. केएल पटेल, मायापति दुबे व ललितपति त्रिपाठी के साथ ही चन्द्रमा यादव को भी नामजद किया गया। मुकदमा दर्ज होने के बाद से ही चन्द्रमा यादव फरार चल रहे थे। उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट और कुर्की की कार्रवाई शुरू कर दी गई थी। एसटीएफ और पुलिस उनकी ताक में लगी थी। इसी बीच उनके शहर आने की सूचना मिली और सटीक सूचना पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

चंद्रमा यादव पर आरोप है कि वह अपने रसूख और पहुंच का इस्तेमाल कर अपने काॅलेज में बड़ी-बड़ी भर्ती परीक्षाओं का सेंटर बनवाते थे। चूंकि पेपर परीक्षा से एक दिन पहले ही पहुंच जाते हैं। ऐसे में इन लोगों को मौका मिल जाता और एक दिन पहले पहुंचने वाले पेपर को लीक कर गिरोह के सरगना डाॅ. केएल पटेल और उनके साॅल्वरों तक पहुंचवा देते थे। इसके बाद शुरू होता था गिरोह का खेल। गिरोह के नेटवर्क में कई साॅल्वर शामिल होते थे साॅल्वर उसे हल करते और उसके बाद ब्लूटुथ डिवाइस की मदद से उन्हें पहले से तय अभ्यर्थियों तक पहुंचा देते थे। इस फर्जीवाड़े के बदले अभ्यर्थियों से छह से सात लाख रुपये की मोटी रकम वसूली जाती थी। पुलिस ने इस मामले में 18 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर अब तक 15 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें तीन अभ्यर्थी भी शामिल हैं। एसटीएफ को इस मामले में अभी तीन लोगों की तलाश है।