
महाकुंभ 2025 के मेले में आंध्र प्रदेश और कर्नाटक से लाई गई पुंगनूर नस्ल की गायें विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। इन गायों की ऊंचाई, लंबाई और चौड़ाई सामान्य गायों की तुलना में काफी कम होती है, जिससे ये उत्तर भारत में पाई जाने वाली देशी गायों के बछड़ों के समान दिखाई देती हैं। इनकी खुराक भी कम होती है, और ये दूध भी देती हैं।
प्रयागराज में वाराणसी से आए अघोरी कापालिक बाबा के आश्रम में यह गाएं मुख्य आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। दिन भर यह गाएं बाबा के इर्द-गिर्द घूमती रहती है। महाकुंभ मेले में इन गायों की उपस्थिति लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है, और गौ संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सहायक है।
पुंगनूर गायों का दूध 8% वसा के साथ औषधीय गुणों से भरपूर होता है, जबकि सामान्य गाय के दूध में 3 से 3.5 प्रतिशत तक ही वसा मिलता है। इनकी देखभाल में भी कम खर्च आता है, और इन्हें पालने के लिए ज्यादा जगह की आवश्यकता नहीं होती। इसलिए, छोटे घरों में रहने वाले लोग भी इन गायों को पालकर गौ सेवा कर सकते हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास भी इस नस्ल की एक गाय मौजूद है। पुंगनूर गायों की कीमत उनकी दुर्लभता के कारण 1 लाख से 25 लाख रुपये तक हो सकती है। इनकी विलुप्ति की आशंका के चलते संरक्षण के प्रयास जारी हैं।
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Published on:
04 Feb 2025 07:06 pm
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