
जब सत्रह श्रृंगार कर नागा सन्यासी निकले शाही स्नान को, देखने वालों की नजर ठहरी रह गई
कुंभ में संगम की रेती पर दिव्य और भव्य शाही स्नान जारी है। अखाड़ों के संत-सन्यासी अपने अपने अखाड़ों के साथ पूरी भव्यता के साथ शाही स्नान को पहुंच रहे। देश और दुनिया के लिए अबूझ पहेली नागा सन्यासी सबके आकर्षण के केंद्र हैं। सत्रह श्रृंगार कर नागा सन्यासी शाही स्नान कर रहे।
समाज ने महिलाओं को सोलह श्रृंगार की मान्यता दी है लेकिन संगम तीरे नागा संन्यासियों के सत्रह श्रृंगार सबको अचंभित कर रहा। पूरी रात अपने इष्ट देव की आराधना के बाद नागा सन्यासी संगम तीरे जब सत्रह श्रृंगार के साथ धर्म के जयकारे लगाते हुए पहुंचे तो भीड़ की नजरें उन पर ही ठहर गई।
बता दें कि शाही स्नान में नागा सन्यासी पूरे सज संवर कर अपने अखाड़ों से निकलते हैं। मौसम की मार से बेफिक्र नागा सन्यासी गंगा तीरे जब पहुंचते हैं तो दृश्य मां और नन्हें बच्चे के मिलन सा दिखता है। मानो कोई बच्चा अपनी मां की गोद में उछल कूद मचा रहा हो।
नागा सन्यासी पतित पावनी मां गंगा में जब डुबकी लगाते हैं तो उनके चेहरे की खुशी देखते ही बनती है। दोगुने उत्साह के साथ नागा संत शाही स्नान करते हैं।
जूना अखाड़े के करण पुरी महराज बताते हैं कि सामान्य लोग नित्यक्रिया के बाद खुद को शुद्ध करने के लिए मां गंगा में स्नान करते हैं लेकिन नागा सन्यासी खुद के शुद्धिकरण के बाद शाही स्नान के लिए निकलते हैं वह भी पूरा श्रृंगार करने केबाद।
शाही स्नान के लिए निकलने से पहले नागा सन्यासी अपने पूरे शरीर पर भभूत लगाते हैं। इसके बाद पंचकेश होता है। अगर सन्यासी बाल रखता है तो संवारता है और अगर नहीं रखता तो उसे साफ करता है। बालों को संवारने के बाद जैसे महिलाएं बिंदी, सिंदूर और काजल लगाती है वैसे नागा संत पंच केश के बाद रोरी, तिलक और चंदन से खुद को सजाते हैं।
नागा सन्यासी रुद्राक्ष की माला, कड़ा, चिमटा डमरु और कमंडल धारण करते हैं। दिगम्बर नागा वस्त्र तो नहीं धारण करते पर लंगोट पहन कर निकलते हैं।
नागा संत तिलक, चंदन, गूंथी हुई चोटियां, काजल, चिमटा, डमरु, कमंडल, रुद्राक्ष की माला, कुंडल, रोरी का लेप, कड़ा और बाजुओं में रुद्राक्ष या फूल की माला, अंगूठी, पंच केश, कमर पर रुद्राक्ष या फूल की माला, पैरों में लोहे या चांदी के कड़े, चंदन, लंगोट पहनते हैं। यही उनका सत्रह श्रृंगार होता। सोलह श्रृंगार से अलग नागा सन्यासियों का 17वां श्रृंगार भस्मी श्रृंगार होता है। नागा सन्यासी अपने पूरे शरीर पर भस्म लगाते हैं और भस्म श्रृंगार कर निकलते हैं।
By Prasoon Pandey
Updated on:
04 Feb 2019 06:29 pm
Published on:
04 Feb 2019 02:16 pm
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