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कुम्भ में सबको कांटे व गंदगी से बचाने वालों के मासूम नंगे पैर

Kumbh

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कुम्भ में सबको कांटे व गंदगी से बचाने वालों के मासूम नंगे पैर

करीब 40 किलोमीटर के दायरे में फैले कुम्भ मेले में करोड़ों तीर्थ यात्रियों को कांटों व गंदगी से बचाने वाले हजारों सफाईकर्मियों के मासूम ही नंगे पैर हैं। जिनकी मजबूरी है कि उनको सफाई का मेहनताना समय पर नहीं मिल रहा है। यही नहीं मेहनताना भी इतना ही मिल रहा है कि बच्चों को पेट भी मुश्किल से भर पा रहे हैं। जिसके कारण बच्चे नंगे पांव घूमने को मजबूर हैं।
वैसे तो सरकार कुम्भ के मेले में करीब दो हजार 800 करोड़ रुपए खर्च कर रही है। इस बार पिछले कुम्भ की तुलना किन में काफी अधिक बनाए गए हैं। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार मेले में एक लाख 22 हजार शौचालय बनाए गए हैं। इसके अलावा 20 हजार से अधिक कचरा पात्र भी रखवाए गए हैं। जबकि 2013 के कुम्भ में 34 हजार शौचालय ही बनवाए गए थे। यही नहीं इस बार सफाईकर्मियों की संख्या भी करीब दोगुनी बताई जा रही है। लेकिन सफाईकर्मियों का कहना है कि उनको 260 रुपए के हिसाब से भुगतान किया जाएगा। लेकिन अभी पिछले करीब 20 दिनों से कोई पैसा नहीं दिया गया है। जिसके कारण परेशानी हो रही है।
बच्चे नंगे पैर घूम रहे
सर्दी के मौसम में भी सफाईकर्मियों की ओर से नियमित सफाई हो रही है। फिर भी उनको जितना पैसा दिया जा रहा है वह समय पर नहीं मिल रहा है। यही नैहीं अधिकतर सफाईकर्मियों का कहना है कि महंगाई इतनी बढ़ चुकी है। यह राशि परिवार पालने के लिए न के बराबर है। वैसे भी कुम्भ के मेले में महंगाई और भी अधिक है। जिसके कारण उनको मुश्किल हो रही है। बच्चों के पास जूते तो दूर चप्पल भी नहीं है।
शौचालयों की सफाई बड़ी जिम्मेदारी
सफाईकर्मियों का कहना है कि मेला लम्बा-चैड़ा है। मौके पर पहुंचने के लिए 30 रुपए तो किराए पर खर्च हो जाते हैं। एक-एक शौचालय कीसफाई करने में समय लगता है। सरकार के पैसे से तो खर्च भी नहीं चल रहा है। तीर्थ यात्रियों की तरफ से थोड़ा बहुत दान मिल जाता है। जिससे काम चल रहा है। वैसे मेले में आने वाले अधिकतर तीर्थ यात्रियों की जुबां से यह जरूर निकल रहा है कि मेले में सफाई व्यवस्था अच्छी है।

By Dharmendra Yadav