18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

‘अफसर नहीं सुनते हमारी कोई बात’, 7 जजों के सामने लाचार दिखे यूपी महाधिवक्ता

UP महाधिवक्ता ने शुक्रवार को हाई कोर्ट और जिला न्यायालयों में बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट में हो रही सुनवाई के दौरान खुद को लाचार बताया। उन्होंने कहा कि कोई भी अधिकारी उनकी बात नहीं सुनते हैं।

2 min read
Google source verification
allahabad_hc.png

इलाहाबाद हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता ने खुद को बताया 'लाचार'

उत्तर प्रदेश के महाधिवक्ता ने शुक्रवार को हाई कोर्ट और जिला न्यायालयों में बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट में हो रही सुनवाई के दौरान खुद को लाचार बताया। हाई कोर्ट की 7 जजों की सीनियर बेंच के सामने उन्होंने बताया कि कोई भी अधिकारी हमारी नहीं सुनते हैं और इस कारण वह कोर्ट को ठीक से सहयोग नहीं कर पा रहे हैं।

महाधिवक्ता की इस टिप्पणी को गंभीर मानते हुए सीनियर बेंच ने कहा कि अगर हालात ऐसे ही हैं तो अगली सुनवाई पर संबंधित अधिकारियों को खुद अदालत में मौजूद होना होगा। दरअसल अदालत ने पिछली सुनवाई में इस मामले से जुड़े कई मुद्दों पर जवाब दाखिल करने और जानकारी देने का निर्देश जारी किया था। कोर्ट की सहायता हेतु प्रदेश के प्रमुख सचिव न्याय को भी आना था लेकिन वह कोर्ट नहीं आए जबकि उनके स्थान अपर अपर सचिव न्याय हाजिर हुए थे।

इसके बाद जब कोर्ट ने पिछली सुनवाई में जारी हुए आदेशों के बारे में सवाल किया तो उन्होंने अपनी लाचारी की स्थिति के बारे में बताते हुए कहा कि कोई भी वरिष्ठ अधिकारी सहयोग करने के लिए नहीं कोर्ट नहीं आते हैं। उनकी जगह हमेशा जूनियर अफसरों या फिर कर्मचारियों को भेज दिया जाता है।

महाधिवक्ता ने कोर्ट को अवगत कराया कि पहले के आदेश के अनुसार महानिबंधक और अन्य विभागों के बीच सामंजस्य और संवाद प्रमुख सचिव न्याय को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। जब इस पर कोर्ट ने सवाल किया कि प्रमुख सचिव न्याय कहां है तो अपर प्रमुख सचिव ने सूचित किया कि उनकी जगह अपर प्रमुख सचिव न्याय आए हैं।

इस पर नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने पूछा कि नोडल अधिकारी बन जाने की वजह से वह हिघ्कोर्ट से ऊपर हो गए हैं। इस पर महाधिवक्ता ने कोर्ट को सही जानकारी देने के लिए और वक्त देने की मांग की है।

2015 से मामले की सुनवाई कर रहा हाई कोर्ट

बता दें कि लंबे समय से हाई कोर्ट और जिला न्यायालयों में सिक्योरिटी सीसीटीवी कैमरा, न्यायिक अधिकारीयों के लिए नए आवास और न्याय कक्ष की व्यवस्था करने के अलावा वकीलों के लिए चेम्बर आदि जैसे विभिन्न मुद्दों को लेकर हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही है।

हाई कोर्ट ने साल 2015 में स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका कायम की थी। इस याचिका के जरिए उच्च न्यायलय की 7 जजों की सीनियर बेंच इस मामले में राज्य सरकार के कामों की नियमित मॉनिटरिंग कर रही है। हालांकि समय-समय पर सीनियर बेंच द्वारा कई आदेश जारी किए गए लेकिन उन पर प्रभावी अमल अभी तक नहीं हो पाया है।

मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल की अध्यक्षता में न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर, न्यायमूर्ति मनोज मिश्र, न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल, न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी, न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्र की सीनियर बेंच ने मामले की सुनवाई कर रही है। अब हाई कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई दिसंबर में करेगी।