
इलाहाबाद. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी शहर से पशु कॉलोनियों को शहर से बाहर शिफ्ट नहीं करने पर असंतोष जाहिर किया। कोर्ट ने कहा कि पूरे प्रदेश में शहर से बाहर कैटिल कॉलोनी बसाने के लिए 1998 में ही सरकार ने एक योजना तैयार कर शासनादेश जारी कर रखा है। ऐसे में इसका पालन न किया जाना गलत है।
कोर्ट ने बुधवार को वाराणसी शहर से बाहर पशु कॉलोनी बनाने व डेयरी शिफ्ट करने के मामले में मण्डलायुक्त वाराणसी की अध्यक्षता में गठित कमेटी से 10 अप्रैल को रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने जिलाधिकारी, उपाध्यक्ष वाराणसी विकास प्राधिकरण, अध्यक्ष आवास विकास परिषद व नगर आयुक्त नगर निगम वाराणसी की बैठक में पशु कॉलोनी के लिए जमीन तय करने का निर्देश दिया है। सुनवाई 10 अप्रैल को होगी।
यह आदेश चीफ जस्टिस डी.बी.भोसले तथा जस्टिस सुनीत कुमार की खण्डपीठ ने विनय कुमार चैधरी की जनहित याचिका पर दिया है। राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता एम.सी. चतुर्वेदी व अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता रामानन्द पांडेय ने बताया कि मुख्य सचिव ने दूसरी याचिका पर जवाब दाखिल कर दिया है। कई शहरों में पशु कॉलोनी के लिए शहर से बाहर जमीन आवंटित कर दी गयी है।
वाराणसी में जमीन उपलब्ध न होने के कारण अभी तक कॉलोनी बनाने का रास्ता साफ नही हुआ है। नगर निगम की तरफ से विवेक वर्मा ने पक्ष रखा। याची अधिवक्ता रणजीत सक्सेना का कहना है कि शहर से बाहर पशु कालोनी न बनने से पशु सड़कों पर घूमते है। आये दिन दुर्घटनाएं हो रही है। जिस पर रोक लगनी चाहिए। कोर्ट ने 10 अप्रैल तक जिला प्रशासन से निर्णय लेकर कोर्ट को जानकारी देने का निर्देश दिया है।