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सपा विधायक और पूर्व सांसद समेत सात पर मुकदमा

कमला नेहरू एजुकेशन सोसाइटी की जमीन के एग्रीमेंट में सपा विधायक राम सिंह, पूर्व सांसद बाल कुमार पटेल, भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व मैनेजर सुनील देव, समेत सात लोगों के खिलाफ कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज किया गया है। 

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Akansha Singh

Jul 17, 2016

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रायबरेली। कमला नेहरू एजुकेशन सोसाइटी की जमीन के एग्रीमेंट में सपा विधायक राम सिंह, पूर्व सांसद बाल कुमार पटेल, भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व मैनेजर सुनील देव, समेत सात लोगों के खिलाफ कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज किया गया है। यह मुकदमा फ्रीहोल्ड कराई गई जमीन पर काबिज एक भू मालिक के साथ मारपीट व जान से मारने की धमकी देने को लेकर दर्ज किया गया है।

रायबरेली में कमला नेहरू एजुकेशन सोसाइटी की पांच बीघा जमीन को धोखे से फ्रीहोल्ड कराकर भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व मैनेजर सुनील देव ने दस्यु सरगना ददुआ के भाई पूर्व सांसद बाल कुमार पटेल को बेचने के लिए एग्रीमेंट करा लिया। इस बेशकीमती जमीन का मात्र नौ करोड़ 30 लाख रुपये में एग्रीमेंट कर दिया गया। जमीन जब बाल कुमार पटेल के पास पहुंच गई तो उस पर कब्जा करने के लिए ददुआ के परिवार ने पूरा जोर लगा दिया। इसी के चलते जमीन पर 50 साल से काबिज वार्ड 19 सिविल लाइन निवासी सुरेश मौर्या को वहां से हटने की धमकी दी गई थी। इस पर सुरेश ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट से फरियाद लगाई। कोर्ट ने मामले में सुनील देव निवासी फ्रेंडस कॉलोनी नई दिल्ली, सुनील तिवारी, सरदार सुरजीत सिंह, पूर्व सांसद बाल कुमार पटेल उनकी पत्नी रमाबाई, पुत्र राम सिंह व राकेश के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। कोतवाली पुलिस ने इन सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

पत्नी के नाम कराई जमीन

जमीन का एग्रीमेंट बाल कुमार पटेल ने अपनी पत्नी रमाबाई के नाम पर कराया है। असल में सुनील देव ने बाल कुमार को इसलिए जमीन बेचने की साजिश की क्योंकि जमीन पर जो लोग 50 साल से काबिज हैं उन्हें ददुआ का परिवार ही बेदखल कर सकता है। यही कारण है कि, सुनील देव ने बातचीत में कहा था कि, उन्हें अभी तक कोई प्रभावशाली खरीदार नहीं मिला था। पूर्व सांसद बाल कुमार पटेल के दिलचस्पी लेते ही जमीन का एग्रीमेंट कर दिया गया।

खुलना था कॉलेज

असल में 70 के दशक में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के आदेश पर ट्रस्ट को बालिका स्कूल खोलने की जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद सारा मामला ठंडे बस्ते में चला गया। यह जमीन बाबू कैलाश चंद्र निवासी रुदौली, बाराबंकी की है। जिसे 30 साल के लिए कमला नेहरू एजुकेशन सोसाइटी ने किराये पर लिया था।