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जहरीली गैस ने उजाड़ दिया हंसता-खेलता परिवार, तीन दिन पहले आग ने बरपाया था कहर, देखें वीडियो

रायबरेली थाना क्षेत्र के नेमुलापुर मजरे कुंभी गांव में कुएं में गैस सिलेन्डर निकालने उतरे नवयुवक की दर्दनाक मौत हो गई...

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जहरीली गैस ने उजाड़ दिया हंसता-खेलता परिवार, तीन दिन पहले आग ने बरपाया था कहर, देखें वीडियो

रायबरेली. चंद मिनट पूर्व पिता अनिल के साथ खेल रहे मासूम अंश (1) और पीहू (3) को क्या पता था कि उसके पिता उन्हें छोड़ कर चले जाएंगे। मृतक अनिल तीन भाइयों में मंझला भाई था, जो कार पेंटिंग करके किसी तरह परिवार की जीविका चलाता था। अनिल की मौत के बाद मृतक की पत्नी के सामने बच्चों के पालन पोषण की समस्या उत्पन्न हो गई है। खबर मिलते ही पहुंचे जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि सतेंद्र सिंह उर्फ शशि भदौरिया, भाजपा नेता रामशरन यादव ने पीड़ित परिजनों को ढाढ़स बंधाया।

रायबरेली थाना क्षेत्र के नेमुलापुर मजरे कुंभी गांव में कुएं में गैस सिलेन्डर निकालने उतरे नवयुवक की दर्दनाक मौत हो गई। बीती शनिवार को घर में बिजली से लगी आग में सब कुछ जल गया था। घटना से गांव में जहां हड़कंप मचा हुआ है, वहीं मृतक के बूढ़े मां बाप, पत्नी दूधमूहा बच्चा व भाई बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया, लेकिन गांव में मातम छाया हुआ है।

क्या है पूरा मामला
26 मई 2018 को दोपहर के समय नेमुलापुर मजरे कुम्भी ग्राम सभा में तीन घरों में भीषण आग लग गई थी। जिसकी चपेट में आकर भागीरथ विश्वकर्मा ,शंकर पाल, छविनाथ पासी के आशियाने जलकर खाख हो गए थे। प्रचंड अग्नि ने भागीरथ विश्वकर्मा के घर की समूल गृहस्थी जलाकर खाख कर दी थी। वहीं भागीरथ के घर में रखे एलपीजी गैस सिलेंडर को आग से गर्म देखकर ब्लास्ट होने के डर से रस्सी में बांधकर कुएं में फेंक दिया गया था। इसी कएं में एक बाल्टी भी चली गई थी। अग्नि हादसे से पीड़ित भागीरथ का परिवार एक-एक दाने को मोहताज हो गया है।

दो दिन पूर्व हुए अग्नि हादसे से भागीरथ का परिवार संभल भी न पाया था कि अग्नि पीड़ित भागीरथ विश्वकर्मा के मंझले पुत्र अनिल कुमार ने पहले रस्सी खींच कर सिलेंडर को बाहर निकाला। फिर कुएं में उतराती बाल्टी को निकालने के लिए स्वयं रस्सी के सहारे कुएं में उतर गया। बताते हैं कि अनिल पानी की सतह तक पहुंच भी न पाया था कि कुएं से निकलती जहरीली गैस से वह बेहोश होकर गिर पड़ा, जब तक उसे बाहर निकाला जाता उसकी मौत हो चुकी थी। मौत की खबर सुनते ही गांव में कोहराम मच गया। मृतक की पत्नी विमला मां राजकुमारी पिता भागीरथ का रो-रो रो कर बुरा हाल है।

अनिल को बचाने के लिए कुएं में नहीं उतरे लोग
वर्ष 2011 का दर्दनाक मंजर याद करके आज भी लोगों की रूह कांप उठती है। बताते चलें कि शिवगढ़ थाना क्षेत्र के बबुरिहा खेड़ा गांव में 11 मई वर्ष 2011 का वह दर्दनाक मंजर आज भी समूचे जनपद को याद है। कुएं कि सफाई करने के लिए कुएं उतरे एक व्यक्ति की जान बचाने के लिए बारी-बारी से कुए में उतरे 6 लोगों की जहरीली गैस से दर्दनाक मौत हो गई थी। यही कारण था कि आज अनिल के बेहोश होकर पानी में डूबते ही गांव के लोगों को कुएं से निकलने वाली जहरीली गैस का आभास हो चुका था। किसी ने कुएं में उतरना मुनासिब नहीं समझा, वरना इससे भी बड़ा हादसा हो सकता था।

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