
रायबरेली के भाजपा नेताओं ने सवर्ण भाजपा सांसद और विधायकों को भेजी चूड़ियां, PC- X
रायबरेली : जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लागू किए गए नए नियमों को लेकर देशभर में विरोध तेज होता जा रहा है। अब यह विरोध सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के भीतर भी खुलकर सामने आने लगा है। कई बीजेपी नेताओं ने इन नियमों के खिलाफ इस्तीफा तक दे दिया है। इसी कड़ी में रायबरेली में विरोध और आक्रामक रूप लेता दिख रहा है, जहां किसान नेताओं और हिंदू संगठनों ने नियमों का विरोध न करने वाले नेताओं को चूड़ियां भेजने का ऐलान किया है।
दरअसल, UGC ने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव रोकने के उद्देश्य से कुछ नए और सख्त नियम जारी किए हैं। इन नियमों को लेकर सवर्ण समाज में नाराजगी है। उनका आरोप है कि इन प्रावधानों का दुरुपयोग कर सवर्ण छात्रों को निशाना बनाया जा सकता है। सवर्ण संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर नियम वापस नहीं लिए गए तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
रायबरेली में बीजेपी से जुड़े किसान नेताओं और हिंदू रक्षा दल ने UGC नियमों के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। इन संगठनों का कहना है कि सवर्ण समाज से आने वाले बीजेपी विधायक, सांसद और मंत्री इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं। इसी नाराजगी के चलते ऐसे नेताओं को प्रतीकात्मक रूप से चूड़ियां भेजने की तैयारी की जा रही है।
बीजेपी किसान नेता रमेश बहादुर सिंह ने कहा कि, 'परिवार पहले है और पार्टी बाद में। मैं 40 साल से बीजेपी से जुड़ा हूं, लेकिन आज सवर्ण समाज के हित में कोई बोलने को तैयार नहीं है। चूड़ियां इसलिए भेजी जा रही हैं कि जो सांसद-विधायक चुप हैं, वे घर बैठें और उनकी पत्नियां मैदान में उतरें, क्योंकि कम से कम वे संघर्ष तो करेंगी।'
उन्होंने आगे कहा कि, 'जो अपनी जाति और अपने बच्चों के भविष्य के लिए नहीं बोल सकता, वह किसी का नहीं हो सकता। इन नियमों से हमारे बच्चे इंटर के बाद पढ़ाई से वंचित हो सकते हैं। चाहे कुछ भी हो जाए, विरोध जारी रहेगा।'
गौ रक्षा दल के नेता महेंद्र पांडेय ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'हम उन बीजेपी नेताओं को चूड़ियां भेज रहे हैं जिनके मुंह में दही जमा है। अब देश महिलाओं को संभालना पड़ेगा, क्योंकि ये नेता सिर्फ सत्ता की मलाई खा रहे हैं। चूड़ियां पहनकर घर बैठ जाएं और घर की महिलाएं मैदान में उतरें।'
महेंद्र पांडेय ने आरोप लगाया कि UGC के नियमों से सवर्ण छात्रों को अपनी बात रखने का मौका भी नहीं मिलेगा और सीधे सजा दी जाएगी। उन्होंने कहा, 'पहले हिंदू-मुस्लिम में बांटा गया और अब जातियों में बांटने की कोशिश हो रही है। विधायक-सांसद अपने बच्चों को विदेश में पढ़ाते हैं, इसलिए उन्हें इन नियमों से फर्क नहीं पड़ता।'
फिलहाल UGC के नियमों को लेकर सियासत लगातार गरमाती जा रही है। एक ओर सरकार का दावा है कि नियम भेदभाव रोकने के लिए हैं, वहीं दूसरी ओर सवर्ण संगठन इसे अपने अस्तित्व और भविष्य से जोड़कर देख रहे हैं।
Published on:
27 Jan 2026 04:06 pm
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