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UGC बिल के कारण BJP में फूट! नहीं रुक रहा इस्तीफे का दौर, इन नेताओं ने छोड़ी पार्टी

UGC की नई नीतियों को लेकर BJP के अंदर विरोध तेज हो गया है। रायबरेली में किसान मोर्चा उपाध्यक्ष, बिलसंडा में बूथ अध्यक्ष और नोएडा में युवा मोर्चा उपाध्यक्ष ने इस्तीफा दे दिया।
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रायबरेली

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Anuj Singh

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Updated: 27 Jan 2026, 11:28 AM IST

2027 चुनाव से पहले BJP को बड़ा झटका

2027 चुनाव से पहले BJP को बड़ा झटका Source- Patrika

BJP Leanders Resigned in Protest against New UGC Rules: देशभर में UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) की नई नीतियों को लेकर विरोध तेज हो गया है। अब यह विरोध बीजेपी के अंदर भी पहुंच गया है। पार्टी के कई कार्यकर्ता और पदाधिकारी UGC के नए नियमों को "काला कानून" बताकर इस्तीफा दे रहे हैं। ये नियम उच्च शिक्षा में समानता लाने के नाम पर लाए गए हैं, लेकिन कई लोग इन्हें सवर्ण समाज के खिलाफ मान रहे हैं। इससे पार्टी के लिए बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

रायबरेली में किसान मोर्चा के वाइस प्रेसिडेंट का इस्तीफा

रायबरेली की सलोन सीट से बीजेपी किसान मोर्चा के वाइस प्रेसिडेंट श्याम सुंदर त्रिपाठी ने UGC की नई नीतियों से असंतुष्टि जताते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा कि ये नियम सामान्य वर्ग के छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। श्याम सुंदर त्रिपाठी ने पार्टी के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे नियमों का समर्थन करना उनके लिए संभव नहीं है।

बिलसंडा में बूथ अध्यक्ष का इस्तीफा

बिलसंडा क्षेत्र के चपरौवा कुइयां गांव के भाजपा बूथ अध्यक्ष कृष्ण कुमार तिवारी ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने बिलसंडा मंडल अध्यक्ष को भेजे इस्तीफे में लिखा कि वे पार्टी द्वारा UGC और एससी-एसटी जैसे कानूनों का समर्थन करने और लागू करने से पूरी तरह असहमत हैं। उनका कहना है कि ये कानून समाज में विभाजन पैदा करते हैं।
कृष्ण कुमार तिवारी ने आगे कहा कि ऐसे निर्णयों के साथ जुड़े रहना उनके वैचारिक, सामाजिक और नैतिक सिद्धांतों के खिलाफ है। यह उनके आत्मसम्मान और विचारधारा के विरुद्ध है।

नोएडा में युवा मोर्चा उपाध्यक्ष का बगावती रुख

नोएडा में बीजेपी युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष राजू पंडित ने भी UGC की नई नीति को "काला कानून" बताते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा कि यह नीति सवर्ण समाज के हितों के खिलाफ है। राजू पंडित ने पार्टी के भीतर से ही सरकार की नीति पर सवाल उठाए हैं। उनका इस्तीफा बीजेपी के लिए और बड़ा संकेत है कि असंतोष बढ़ रहा है।
पार्टी के लिए बढ़ती चुनौती इन इस्तीफों से साफ है कि UGC की नई नीतियां बीजेपी के कार्यकर्ताओं में गहरी नाराजगी पैदा कर रही हैं। यूपी के अलग-अलग जिलों में नेता और पदाधिकारी एक के बाद एक इस्तीफा दे रहे हैं।

पहले लखनऊ में 11 पदाधिकारियों ने सामूहिक इस्तीफा दिया था। अब रायबरेली, बिलसंडा और नोएडा से भी आवाजें उठ रही हैं। पार्टी के अंदर से ही सरकार की नीति पर सवाल उठना और पद छोड़ना बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। यह विरोध सिर्फ शिक्षा का मुद्दा नहीं रह गया, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर भी असर डाल रहा है।