
सहालग में भी बाजार पड़ा सूना, रोज़ बदलते दामों ने बढ़ाई व्यापारियों और ग्राहकों की चिंता (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)
Gold Price Sarafa Bazar: सोना और चांदी भारतीय समाज में केवल धातु नहीं, बल्कि परंपरा, निवेश और सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक माने जाते हैं। खासतौर पर शादी-ब्याह और सहालग के मौसम में सर्राफा बाजारों में रौनक देखने को मिलती है। लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग ही नजर आ रही है। सोना-चांदी के लगातार बढ़ते और अस्थिर होते भाव ने सर्राफा कारोबार को गहरे संकट में डाल दिया है। सहालग का समय नजदीक होने के बावजूद रायबरेली के सर्राफा बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है।
रायबरेली के सर्राफा बाजार में सोना 1,56,700 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 3,07,000 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिकी। ये दरें आम मध्यमवर्गीय परिवारों की पहुंच से काफी बाहर होती जा रही हैं। जिन परिवारों ने पहले से शादी या अन्य शुभ अवसरों के लिए खरीदारी की योजना बनाई थी, वे अब या तो खरीदारी टाल रहे हैं या फिर मजबूरी में बेहद सीमित मात्रा में गहने ले रहे हैं।
आमतौर पर सहालग के समय सर्राफा बाजारों में ग्राहकों की भीड़ देखने को मिलती है। दुकानों पर डिजाइन दिखाने, ऑर्डर बुक होने और एडवांस पेमेंट का सिलसिला तेज हो जाता है। लेकिन इस बार हालात इसके उलट हैं। दुकानों पर ग्राहक कम पहुंच रहे हैं और जो आ भी रहे हैं, वे केवल भाव पूछकर लौट जा रहे हैं। इससे व्यापारियों में मायूसी साफ झलक रही है।
स्थानीय सर्राफा व्यापारी विष्णु कुमार सोनी, अनिल सोनी और रिंकू सोनी का कहना है कि सोने-चांदी के दामों में आई तेजी का सीधा असर बिक्री पर पड़ा है। उन्होंने बताया कि पहले जहां ग्राहक भारी हार, कंगन और सेट खरीदते थे, अब वे हल्के गहनों या कम वजन की ज्वैलरी तक सीमित हो गए हैं। इससे न केवल बिक्री की मात्रा घटी है, बल्कि मुनाफा भी पहले की तुलना में काफी कम हो गया है।
सर्राफा व्यापार में सबसे बड़ी समस्या रोज बदलते भाव बनते जा रहे हैं। व्यापारी सुरेंद्र गुप्ता, ललित कुमार सोनी और संदीप सोनी का कहना है कि वैश्विक बाजार में अस्थिरता के कारण सोना-चांदी के दाम हर दिन बदल रहे हैं। ऐसे में न तो ग्राहक स्थिर भाव पर खरीदारी कर पा रहे हैं और न ही व्यापारी जोखिम उठाने को तैयार हैं। कई बार ऐसा होता है कि सुबह खरीदा गया माल शाम तक महंगा या सस्ता हो जाता है, जिससे घाटे का खतरा बना रहता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता, डॉलर की स्थिति, ब्याज दरों में बदलाव, भू-राजनीतिक तनाव और निवेशकों का सोने की ओर झुकाव, इन सभी कारणों से सोना-चांदी के दामों में उछाल देखने को मिल रहा है। वैश्विक बाजार में बढ़ती कीमतों का असर सीधे घरेलू बाजार पर पड़ रहा है, जिससे स्थानीय व्यापारियों और ग्राहकों दोनों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
सर्राफा कारोबार से जुड़े छोटे दुकानदार इस स्थिति से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। सीमित पूंजी में काम करने वाले व्यापारियों के लिए महंगे दामों पर माल स्टॉक करना जोखिम भरा हो गया है। कई व्यापारियों का कहना है कि यदि यही हालात बने रहे, तो छोटे सर्राफा दुकानदारों को मजबूरी में अपना व्यवसाय बंद करना पड़ सकता है या किसी बड़े कारोबारी के साथ जुड़ना पड़ेगा।
बढ़ती महंगाई और सोने-चांदी के ऊंचे दामों के चलते ग्राहकों की प्राथमिकताएं भी बदल रही हैं। अब लोग भारी आभूषणों की जगह हल्के, सिंपल और कम वजन वाले डिजाइनों को प्राथमिकता दे रहे हैं। कुछ ग्राहक सोने की जगह चांदी या आर्टिफिशियल ज्वेलरी की ओर भी रुख कर रहे हैं, जिससे पारंपरिक सर्राफा कारोबार को और झटका लग रहा है।
एक वर्ग ऐसा भी है जो सोने को निवेश के रूप में देखता है। लेकिन कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव के कारण वे भी फिलहाल सतर्कता बरत रहे हैं। निवेशकों को डर है कि ऊंचे दामों पर खरीदारी करने के बाद कीमतों में गिरावट आ सकती है, जिससे नुकसान उठाना पड़ सकता है।
सर्राफा कारोबार से जुड़े संगठनों ने भी मौजूदा हालात पर चिंता जताई है। व्यापारियों का कहना है कि सरकार और संबंधित एजेंसियों को इस ओर ध्यान देना चाहिए ताकि बाजार में स्थिरता आ सके। साथ ही, छोटे व्यापारियों को राहत देने के लिए कुछ नीतिगत कदम उठाए जाने की मांग भी की जा रही है।
Updated on:
22 Jan 2026 08:54 pm
Published on:
22 Jan 2026 08:54 pm
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