17 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जिला अस्पताल में तीमारदारों ने किया हंगामा, इलाज में की जा रही थी लापरवाही

जिला अस्पताल में रविवार को तीमारदारों ने हंगामा किया और इमरजेंसी में चिकित्सकों के साथ गाली-गलौज की गई।

2 min read
Google source verification
accident,mlc,Doctor,Raebareli ,injection scam,Tired,accident in raebareli,Raebareli Hospital,scame in raebareli hospital,Raebareli health Department,

रायबरेली : जनपद के जिला अस्पताल में मरीजों और डॉक्टरों में अधिकतर गाली-गलौज के मामले सुनाई पड़ते है। मामला सीधा सा है कि मरीज को जब इलाज के लिए रात के वक्त इमरजेंसी में भर्ती कराते है तो पता चलता है कि डॉक्टर मौके पर ही नहीं हैं और दवाईयां भी बाहर की लिख दी जाती है। इसी को लेकर तीमारदारों के मरीजों का जल्द इलाज न हो पाने के कारण तीमारदारों का गुस्सा भड़क उठता है। डॉक्टर से गाली गलोज तक की नौबत आ जाती है। ये अधिकतर लोगों के साथ यह किस्सा हो गया है।

डाक्टरों ने की मामला शांत कराने की कोशिश

रविवार को जिला अस्पताल में तीमारदारों ने हंगामा किया। इमरजेंसी में चिकित्सकों के साथ गाली-गलौज की गई। आरोप लगाया गया कि इलाज में लापरवाही की जा रही थी। वहीं इमरजेंसी में चिकित्सक व कर्मचारी न होने की बात भी कही गई । किसी तरह इस मामले को कर्मचारियों ने और मौके पर आए डाक्टरों ने मामला शांत कराने की कोशिश की।

बच्चे को दर्द से तड़पता देख भड़क उठे परिजन

इंदिरा नगर निवासी सुनील का पुत्र सिद्धार्थ मार्ग दुर्घटना में घायल हो गया था। घायल अवस्था में उसे जिला अस्पताल लाया गया। यहां परिजनों के अनुसार लगभग 15 से 20 मिनट तक किसी भी कर्मचारी या चिकित्सकों ने उसके बच्चे का प्राथमिक उपचार तक नहीं किया। बच्चे को दर्द से तड़पता देख परिजन भड़क उठे और अस्पताल में हंगामा करना शुरू कर दिया। इसके बाद हरकत में आए चिकित्सकों ने घायल का इलाज करना शुरू किया। मामले में ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डॉक्टर अतुल पांडे ने बताया कि जैसे ही घायल युवक आया उसके इलाज की व्यवस्था की गई लेकिन फिर भी गाली गलोच हंगामा किया गया।

मामला अस्पताल का है और अस्पताल में पूरा बाहर की दवा लिखने का होता है।

जिला अस्पताल में बाहर से दवा लिखने का सिलसिला थम नहीं रहा है। अगर सूत्रों की माने तो एक इंजेक्शन नैसेफास है जो समस्या की सबसे बड़ी जड़ है। इसे लिखने की हर किसी को जल्दी रहती है। इसकी कीमत करीब तीन सौ के आस-पास है। वहीं यह बाहर का ही लिखा जाता है। इसके कमीशन पर खेल बहुत तेजी से हो रहा है। जिला अस्पताल में बाहर की दवा लिखे जाने को लेकर शिक्षक एमएलसी सुरेश कुमार त्रिपाठी सदन में भी मामला उठा चुके हैं। एमएलसी ने सीएमओ पर सवाल दागे थे। और अगर इस मामले की जांच होती है। तो काफी कुछ दूध का दूध और पानी का पानी निकल कर आम जनता के सामने आएगा।