
रायबरेली. रायबरेली में जिला अस्पताल के डॉक्टर वीरबल ने लकवा(पैरालिसिस) की बीमारी से निपटने के लिए कई सुझाव दिए हैं। उनकी कोशिशों के चर्चे जिले भर में हैं। दिल्ली के आयुर्विज्ञान संस्थान की ओर से दिल्ली में आयोजित कार्यशाला में चिकित्सकों ने अपने विचार व्यक्त किये। इस दौरान रायबरेली के डॉक्टर वीरबल ने भी अपने विचार रखे।
उनका मानना है की देश के सभी जनपदों में स्ट्रोक यूनिट खोली जाए, साथ ही एंबुलेंस सर्विस को मजबूत करते हुए एक ऐसा टोल फ्री नंबर आम जनता को दिया जाए जिससे उसकी सूचना मिलते ही सभी चिकित्सक की सुविधाएं मरीज पहुंचने के पहले अस्पताल तैयार हो जाए। उक्त विचार दिल्ली के आयुर्विज्ञान संस्थान की ओर से दिल्ली में आयोजित कार्यशाला में चिकित्सकों ने व्यक्त किये। इसमें भारत के तीन और प्रदेश के 2 चिकित्सकों में शामिल अस्पताल में तैनात चिकित्सको में रायबरेली के जिला अस्पताल के डॉक्टर बीरबल ने भी भाग लिया।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉक्टर बीरबल के अनुसार यदि किसी मरीज को लकवा का अटैक होता है तो बिना देर किए हुए मरीज को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाएं और साढ़े चार घंटे के अंदर मरीज को टीपीए जंक्शन लग लग जाना चाहिए। इससे मरीज को समय रहते ही इस बीमारी से बचाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि अधिवेशन में जिले के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से भी विशेषज्ञों को अवगत कराया गया। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल में एक सीटी स्कैन की मशीन होने से भी समस्या आ जाती है। जिले के दूरदराज आने से आने वाले मरीजों को समय से अधिक समय लगता है इसलिए उनका इलाज समय से नहीं हो पाता है लेकिन फिर इन संस्थानों के बीच भी जिला अस्पताल से लकवा के 9 मरीजों को स्वस्थ रख कर घर भेजा जा चुका है।
उन्होंने बताया कि आगे भी लकवा के पीड़ित मरीजों का हरसंभव इलाज करने का प्रयास किया जा रहा है। डॉक्टर बीरबल ने बताया कि यह बीमारी शुगर और ब्लड प्रेशर के शिकार मरीजों को अधिक होती है। इलाज से पहले मरीज बेहोश ना हो और शुगर ब्लड प्रेशर दोनों कंट्रोल में तभी इलाज भी संभव है।
Published on:
05 Dec 2017 11:28 am
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