29 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पेड़ लगाएं-पेड़ बचाएं, कहीं देर न हो जाए: अदिति सिंह

रायबरेली गोज़ ग्रीन अभियान के जरिए लगाए जाएंगे हजारों पेड़, कांग्रेस विधायक अदिति सिंह ने किया लोगों को जागरुक

2 min read
Google source verification
aditi

लखनऊ. रायबरेली सदर विधायक अदिति सिंह ने रायबरेली गोज़ ग्रीन अभियान की शुरुआत की है जिसके तहत वे अपने विधानसभा क्षेत्र की जनता को स्वच्छता व पेड़-पौधे लगाने के लिए जागरुक रही हैं। इसके तहत मंगलवार को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर वह जन जागरण रैली करेंगी। इससे पहले कई स्कूलों में जाकर उन्होंने पौधरोपण कार्यक्रम किए थे।

अदिति ने जनता को जागरुक करने के लिए व इस अभियान को बढ़ावा देने के लिए एक लेख भी लिखा है। इस लेख में उन्होंने पेड़-पौधे के महत्व को बताया है।

अदिति लिखती हैं-

भारतीय संस्कृति दुनिया की एकमात्र ऐसी स्कृति है जिसमें पेड़-पौधों की पूजा की जाती है। पेड़ों को भगवान का दर्जा दिया गया है। इसे आज की युवा पीढ़ी एक प्रकार का अंधविश्वास भी मानती है लेकिन पेड़ों की पूजा करने के पीछे के तार्किक कारण ऐसे हैं, जो मानव सभ्यता के जीवन से जुड़े हैं। दरअसल पेड़- पौधे हमारे जीवन के लिए बहुत आवश्यक हैं। इनके बगैर जीवन की कल्पना करना मुश्किल है।

'रायबरेली गोज ग्रीन' अभियान के तहत उन सभी पहलुओं को शामिल किया गया है। जो मानव जीवन को कहीं न कहीं प्रभावित करते हैं । इस अभियान के तहत स्वच्छता, पवित्रता, सरकारी सुविधाओं का इस्तेमाल के प्रति लोगों को जागरूक किया जाएगा। गांव और वार्डों में एम्बुलेंस, पुलिस, सफाईकर्मी, जिम्मेदार अधिकारियों के नम्बरों की एक-एक लिस्ट चस्पा कराई जाएगी। जिससे लोग इन सरकारी सुविधाओं के प्रति जागरूक हो सकें और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझ सकें। साथ ही जिम्मेदारी से दूर भागने वाले अधिकारियों की शिकायत को ऊपर तक पहुंचा सकें।

इस अभियान में हर व्यक्ति की सहभागिता जरूरी है। जिससे हम रायबरेली को एक प्रेरणास्रोत के रूप में देश के सामने खड़ा कर सकें। इसी को देखते हुए आगामी स्वतंत्रता दिवस के दिन 'रायबरेली गोज ग्रीन' अभियान के तहत एक मेगा रैली निकाली जायेगी। जिसके तहत अस्वच्छता, प्रदूषण से पूरी तरह स्वतंत्र होने के बारे में जागरूक किया जाएगा।

'रायबरेली गोज ग्रीन' अभियान उस भारतीय संस्कृति को बचाने की ओर पहला कदम है जिसे वेदों में अरण्य संस्कृति के नाम से जाना जाता था क्योंकि भारतीय संस्कृति और सभ्यता की शुरुआत ही पेड़ -पौधों से हुई है। भारतीय ऋषि-मुनियों, दार्शनिको ने लोकमंगल की भावना को ध्यान में रखते हुए रखते हुए अरण्य (वनों) में ही वेद-वेदांगों, उपनिषदों आदि की रचना की थी।

इस अभियान का उद्देश्य लोगों में पेड़-पौधों के प्रति ख़त्म होती आस्था को दोबारा वापस लाना है। साथ में हर स्तर पर हरियाली को लेकर लोगों को जागरूक करना है।

Story Loader