रायगढ़. रायगढ़ जिले में ८० हाथियों का दल विचरण कर रहा है। इसमें रायगढ़ वन मंडल में ३६ हाथियों का दल है तो धरमजयगढ़ वन मंडल में ४४ हाथियों का दल विचरण कर कर रहा है। इसमें कुछ हाथी ऐसे हैं तो रात होते ही जंगल से बाहर आते हैं और किसानों की खेत में पहुंच कर फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसको लेकर ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है।
रायगढ़ जिले में दो वन मंडल हैं। मौजूदा समय में हाथियों का अलग अलग दल धरमजयगढ़ वन मंडल में विचरण कर रहा है, जिसकी संख्या ४४ है। विभागीय अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार छाल रेंज के लोटान, हाटी, पुरंंगा, बेहरामार, गलीमार व बोजिया में एक-एक हाथी विचरण कर रहे हैं। इसके अलावा धरमजयगढ़ रेंज के ११ हाथियों का दल विचरण कर रहा है। इसमें दो नर, ८ मादा व एक शावक शामिल हैं। इसके अलावा कापू रेंज के पुसाऊडेरा क्षेत्र १२ हाथियों का दल विचरण कर रहा है। इसमें ३ नर, ६ मादा व ३ शावक शामिल हैं। साथ ही लैलूंगा रेंज के सोनाजोरी में १३ हाथियों का दल विचरण कर रहा है। इसमें ९ नर, २ मादा व २ शावक है। साथ ही लैलूंगा रेंज के ही तोलगे व बगुडेगा में एक-एक हाथी विचरण कर रहा है। इसके अलावा रायगढ़ वन मंडल के बंगुरसिया पश्मि में १० हाथियों का दल विचरण कर रहा है। इसमें ३ नर, ६ मादा व एक शावक है। वहीं बंगुरसिया पूर्व में एक हाथी व बंगुरसिया के काटाझरिया में चार हाथियों का दल विचरण कर रहा है। इसमें २ नर, एक मादा व एक शावक है। वहीं घरघोड़ा रेंज के चारमार व अमलीडीह में एक-एक हाथी तो घरघोड़ा के पुसल्दा में १८ हाथियों का दल विचरण कर रहा है। इसमें ३ नर, ११ मादा व ४ शावक शामिल है। साथ ही तमनार रेंज के सामारूमा क्षेत्र में एक हाथी विचरण कर रहा है।
तीन जगह फसल को पहुंचाया नुकसान
हाथियों के दल ने तीन जगह पर ग्रामीणों की फसल को नुकसान पहुंचाया है। बताया जा रहा है कि धरमजयगढ़ वन मंडल के रिलो में एक किसान, तो नागदरहा में एक किसान और छाल रेंज के बेहरामार में एक किसान की फस को हाथियों ने नुकसान पहुंचाया है। इसकी सूचना प्रभावित किसानों के द्वारा दिए जाने पर विभागीय अमला मौके पर पहुंच कर नुकसान का आंकलन कर लिया है।
ग्रामीणों में दहशत का माहौल
मौजूदा समय में दोनों वन मंडल में ८० हाथियों की मौजुदगी है। इसको लेकर ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है। कई बार स्थिति यह हो जाती है कि रात के समय ग्रामीण रतजगा करते हैं, ताकि हाथियों के आने पर अन्य ग्रामीणों की मदद से उन्हें जंगल की ओर खदेड़ा जा सके। वहीं दूसरी ओर वन विभाग के अधिकारी हाथियों से किसी प्रकार की छेडख़ानी नहीं किए जाने बात कहते हैं। उनका मानना है कि हाथियों के साथ बेवजह छेडख़ानी किए जाने से बड़ी अनहोनी हो सकती है।