
CG Assembly Elections : जिले की पांच विधानसभा सीटों में सारंगढ़ को छोड़कर बसपा का हाथी कहीं नहीं दिखता
रायगढ़. प्रदेश में जोगी और बसपा गठबंधन के बाद भले ही यह शोर हो कि इस बार मुकाबला टक्कर का हो गया है लेकिन जिले कीपांच विधानसभा सीटों में सारंगढ़ को छोड़कर बसपा का हाथी कहीं नहीं दिखता है। बकायदा आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं। साल 2003 के विधानसभा चुनाव के दौरान जिले में छह विधानसभा हुआ करते थे। इसमें से दो सीटों पर बसपा ने चुनाव लड़ा था। पहली सीट सारंगढ़ की थी जहां ३३.१२ प्रतिशत वोट पाकर कामदा जोल्हे बसपा की विधायक बनी थी। जबकि रायगढ़ विधानसभा में केशव प्रसाद मिश्रा ने बसपा से चुनाव लड़ा और उन्हें ३.२२ प्रतिशत वोट मिला।
जबकि साल २००८ के विधानसभा चुनाव में पांचों सीट पर बसपा ने प्रत्याशी खड़ा किया, पर सफलता कहीं नहीं मिली बल्कि सारंगढ़ की सीट भी हाथ ने निकल गई। इस सीट पर बसपा को जबरदस्त नुकसान हुआ यहां केवल १८.१२ प्रतिशत वोट ही मिला। जबकि लैलूंगा से ४.१२ प्रतिशत यानि ५३९८, रायगढ़ से ३.४० प्रतिशत यानि ५०१३, खरसिया से १.४९ प्रतिशत यानि २११६ और धरमजयगढ़ से ३.८५ प्रतिशत यानि ५०६१ वोट ही मिला।
ज्यादा नहीं होगी मदद
राजनीति के जानकार बताते हैं कि जिले में केवल एक विधानसभा सारंगढ़ है जहां बसपा थोड़ी बहुत शोर मचाती दिखती है। लेकिन यहां पिछले विधानसभा चुनावों से वोट का प्रतिशत जबरदस्त तरीके से गिरा है। दूसरी ओर यहां के लोगों का मानना है कि सारंगढ़ में जोगी कांग्रेस का बैकअप हाथी को बहुत ज्यादा आगे नहीं ले जा सकता है क्योंकि जोगी कांग्रेस भी यहां पूरी तरह से मजबूत नहीं है। इन हालात में जिले के पांचों विधानसभा में बसपा के लिए चुनौती काफी अधिक है।
2013 तो और भी नुकसान वाला
साल २०१३ का विधानसभा चुनाव पार्टी के लिए और भी नुकसान वाला रहा। यहां उम्मीद वाली सारंगढ़ सीट पर वोट प्रतिशत फिर गिरा और यह १२.२१ प्रतिशत यानि २२४७० पर टिक गया, जबकि लैलूंगा से २.०३ प्रतिशत यानि ३१०७ वोट, रायगढ़ से १.८७ प्रतिशत यानि ३२७० वोट, खरसिया से १.५२ प्रतिशत यानि २४३३ वोट वहीं धरमजयगढ़ से ३.१ प्रतिशत यानि ४७६० वोट ही बसपा के हाथी को मिला।
Published on:
04 Oct 2018 11:12 am
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