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रायगढ़

कांग्रेस के किसान नेता ने पार्टी से दिया इस्तीफा

रायगढ़. कांग्रेस के किसान नेता लल्लू सिंह ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा को लेकर लल्लू सिंह ने प्रेसवार्ता आयोजित की। वहीं प्रेसवार्ता में कहा कि वे कई साल से कांग्रेस का झंडा थामे हैं, लेकिन अब जब पार्टी सत्ता में है तो उन्हें महत्व नहीं दिया जा रहा।

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रायगढ़. कांग्रेस के किसान नेता लल्लू सिंह ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा को लेकर लल्लू सिंह ने प्रेसवार्ता आयोजित की। वहीं प्रेसवार्ता में कहा कि वे कई साल से कांग्रेस का झंडा थामे हैं, लेकिन अब जब पार्टी सत्ता में है तो उन्हें महत्व नहीं दिया जा रहा।
यह प्रेसवार्ता शहर के अभियंता भवन में आयोजित की गई थी। प्रेसवार्ता के दौरान लल्लू सिंह का कहना था कि पिछले ४३ वर्षों पार्टी से दिल से जुड़ा रहा हूं। अब जो कांग्रेस से जुड रहे हैं वो दिमाग से जुड़ रहे हैं। वहीं यह आरोप लगाया कि कांग्रेस में जो बोला जाता है वह नहीं किया जा रहा है। वहीं उनका कहना था कि पार्टी के द्वारा उपेक्षा किए जाने को लेकर वे कांग्रेस से इस्तीफा दे रहे हैं। वहीं जब उनसे यह पूछा गया कि संगठन से नाराज होकर पार्टी छोड़ रहे है या विधायक से नाराज होकर तब उनका कहना था कि दोनों से नाराजगी है। इसकी वजह से ऐसा कदम उठाया है। इस दौरान उन्होंने नगरीय निकाय उपचुनाव के दौरान कांग्रेस के शहरी अध्यक्ष अनिल शुक्ला के साथ सीएसपी के साथ हुए विवाद का हवाला देते हुए कहा कि इस विवाद के बाद भी सीएसपी यहां ड्यूटी इससे वे अपने आप को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। वहीं कहा कि और भी कई कांग्रेसी हैं जो पार्टी से उपेक्षित हैं।
नेतानांगर में हुआ था नहर को लेकर विवाद
पिछले दिनों केलो परियोजना में नहर निर्माण कार्य को लेकर नेतानांगर में विवाद की स्थिति निर्मित हुई थी। इस समय लल्लू सिंह ने इसकी अगुवाई की थी। सप्ताह भर तक चले प्रदर्शन के बाद कांग्रेस नेता विभाष सिंह के नेतृत्व में लल्लू सिंह व अन्य ग्रामीण मुख्यमंत्री से मुलाकात करने भी गए थे। इसके बाद नहर निर्माण का काम रोका गया। अब इस बात को लेकर चर्चा बना हुआ है कि लल्लू सिंह आप या फिर भाजपा का दामन थामेगे या वे साइलेंट मोड में रहेंगे।
चर्चाओं का बाजार गर्म
रायगढ़ विधानसभा को लेकर हमेशा से यह आंकलन किया जाता रहा है कि यहां ग्रामीण क्षेत्रों में कांग्रेस की पकड़ मजबूत है, लेकिन इस इस्तीफा के बाद ग्रामीण क्षेत्र में विरोध नजर आ रहा है। ऐसे में यह चर्चा है कि इसे नहीं संभालने पर कांग्रेस की मुसीबत बढ़ सकती है।