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आबंटन से पहले ही खंडहर में तब्दील हो गई निगम की दुकानें

0 लाखों रुपए खर्च कर ट्रांसपोर्टनगर में बनाई है सैकड़ों दुकानें0 जनप्रतिनिधि भी नहीं दे रहे ध्यान

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आबंटन से पहले ही खंडहर में तब्दील हो गई निगम की दुकानें

रायगढ़. शहर के ट्रांसपोर्टनगर को बसाने के लिए निगम द्वारा लाखों रुपए खर्च कर सैकड़ों दुकानें बनाई गई, लेकिन कई साल बित जाने के बाद भी गुलजार नहीं हो सका है। ऐसे में दुकान तो जर्जर हो गई हैं, वहीं उसमें लगे शटर भी गायब हो चुके हैं। जिससे निगम का लाखों रुपए बर्बाद हो गया है।
गौरतलब हो कि विगत कई साल पहले नगर निगम द्वारा जूटमिल स्थित बस स्टैंड को शहर के बाहर शिफ्ट किया गया, ताकि बसें शहर में न घुसकर बाहर से निकल जाएगी, साथ ही यहां से सफर करने वाले यात्रियों को दिक्कत न हो इसके लिए निगम द्वारा ट्रांसपोर्ट नगर में दर्जनों दुकानें भी बनाई गई, लेकिन आज तक इसका आबंटन नहीं हो सका है। जिसके चलते सालों बाद भी ट्रांसपोर्टनगर आबाद नहीं हो सका है। अब तो यहां स्थिति यह हो गई है कि न तो यात्रियों के खड़े होने की सुविधा और न ही उनको कोई सुविधा उपलब्ध हो पा रहा है। साथ ही यहां बसों का भी आगमन बहुत कम हो गया है। वहीं यात्रियों को ध्यान में रखते हुए निगम द्वारा दर्जनों दुकानें तो तैयार की गई, लेकिन अभी तब इसका आबंटन नहीं हो सका है। जिसके चलते सभी दुकानें खंडहर में तब्दील होने लगी है। अब स्थिति यह हो गई है कि अगर यही स्थिति रही आने वाले दिनों में सभी दुकानें धराशायी हो जाएंगी, जिससे निगम का लाखों रुपए बर्बाद हो रहे हैं। इसके बाद भी न तो निगम के अधिकारी ध्यान दे रहे हंै और न ही जनप्रतिनिधि।
शटर भी होने लगे गायब
नवनिर्मित दुकानों का आबंटन नहीं होने के कारण लवारिश स्थिति में पहुंच चुकी है, जिससे अब इन दुकानों के शटर भी गायब होने लगे हैं। हालांकि अभी तक दर्जनों दुकानों के शटर गायब हो चुके हैं। ऐसे में अगर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले दिनों एक भी दुकान में शटर नहीं बचेंगे। स्थानीय लोगों का कहना है कि दुकानों का देख-रेख नहीं होने के कारण कबाड़ चूनने वाले लगातार इसमें तोडफ़ोड कर ले जा रहे हैं। ऐसे में अगर समय रहते आबंटन हो गया होता तो निगम को भी राजस्व का लाभ होता।
उपेक्षा का दंश झेल रहा ट्रांसपोर्टनगर
गौरतलब हो कि ट्रांसपोर्टनगर को यह सोचकर बसाया गया था कि आने वाले दिनों में यहां से अलग-अलग राज्यों के लिए बसें चलेंगी, लेकिन यह सपना ही रह गया। साथ ही ट्रांसपोर्टनगर भी अभी तक आबाद नहीं हो सका है। जिसके चलते यहां बनी दुकानें जर्जर हालत में पहुंच गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब अगर इसका आबंटन भी होता है तो इसमें लाखों रुपए खर्च करने पड़ेंगे, उसके बाद ही आबाद हो सकेगा।
दुकानों को आबाद करने लाएंगे प्रस्ताव
इस संबंध में महापौर जानकी काटजू का कहना है कि फिलहाल ट्रांसपोर्ट नगर में दो सडक़ बनाने के लिए ३९ लाख का प्रस्ताव भेजा गया है, साथ ही वहां के जर्जर दुकानों को दुरस्त कर उसे बहुत जल्द आबाद करने का प्रयास किया जाएगा। इसके लिए एमआईसी की बैठक में प्रस्ताव रखेंगे। ताकि जल्द से जल्द ट्रांसपोर्टनगर आबाद हो सके।