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Video- इतने लोगों के आवास के लिए 62 वृक्षों पर चलाया जा रहा आरा, पीडब्ल्यूडी ईई का ये तर्क…

- पीडब्ल्यूडी 7.5 करोड़ की लागत से बना रहा मल्टी स्टोरी रेसिडेंसियल बिल्डिंग -मुख्यालय में जगह न होने से निर्माण के लिए काटे जा रहे पेड़

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रायगढ़. एक तरफ राज्य सरकार पेड़ों की संख्या बढ़ाने के लिए हरियर छत्तीसगढ़ सहित कई तरह की योजनाएं चलाकर आरोबों रुपए खर्च कर रही है, वहीं दूसरी तरफ उन्हीं का पीडब्ल्यूडी विभाग मात्र 78 रेसिडेंसियल क्वार्टर बनाने के नाम पर 62 पेड़ों की बलि दे रहा है। इसके पीछे पीडब्ल्यूडी ईई एके दीवान का तर्क है कि रायगढ़ में जगह की काफी कमी है, इसके चलते यहां कुछ भी बनाने के लिए पेड़ काटना मजबूरी है।

उनका कहना है कि इसके लिए उन्होंने बाकयदा परमीशन ली है और उसके बाद यह कार्य किया जा रहा है, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या पीडब्ल्यूडी वर्यावरण की सुरक्षा को लेकर भी इतनी तत्परता से ही पौध रोपण व अन्य उपाय के कार्य करती है। पीडब्ल्यूडी से मिली जानकारी के मुताबिक सिंचाई कालोनी के पास न्यायिक विभाग को रेसिडेंसियल क्वार्टर बनाने के लिए जमीन आवंटित की गई थी। वहीं पहले पुराना डीएफओ बंगला हुआ करता था। तब यह जमीन काफी हरी-भरी थी और यहां सैकड़ों की संख्या में पेड़ लगे थे, लेकिन धीरे-धीरे सही निगरानी न होने से पेड़ कटने से यहां मात्र 62 बड़े ईमारती लकड़ी वाले पेड़ बचे थे। इसी दरौन पीडब्ल्यूडी को यहां मल्टीस्टोरी रेसिडेंसियल क्वार्ट बनाने का कार्य दिया गया।

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पीडब्ल्यूडी ने साढ़े सात करोड़ की लागत से बनने वाली इस बिल्डिंग को बनाने का कार्य संतोष कुमार एंड कंपनी को दिया। पीडब्ल्यूडी ने यहां भवन बनाने के लिए इस तरह का लेआउट और नक्सा बनाया है कि यहां बचे हुए सभी 60 वृक्षों को काटना पड़ रहा है और सभी प्रक्रिया पूरी कर परमीशन मिलते ही पीडब्ल्यूडी ने वन विभाग को पेड़ काटने की जिम्मेदारी दे दी है। विभाग चाहे तो किनारे लगे दर्जनों पेड़ अभी भी बचा सकता है, लेकिन इस ओर कोई भी ध्यान नहीं दे रहा है।

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उजड़ गए पंक्षियों के घर
यहां लगे 62 पेड़ों को काट देने से वहां रहे हजारों पक्षियों और जीव जंतुओं के घर उजड़ चुके हैं। कुछ पक्षी तो अपना घरोंदा छोड़कर उड़ गए, लेकिन जिनके चूजे अभी उडऩा भी नहीं सीखे थे और जो बच्चे अंडे से बाहर निकले थे वह आसमान की उड़ान उडऩे से पहले ही मर गए। इन पेड़़ों पर आरा लगाकर इन्हें चंद घटों में धराशाई कर दिया गया, लेकिन इन पक्षियों के बचाव में न तो जंतु प्रेमी आगे आ रहे हैं और न पर्यावरण प्रेमी।

-वहां पर 78 आवासीय क्वार्ट बनाए जाने हैं। इसके लिए पेड़ों को काटना जरूरी था। हमने इसके लिए परमीशन भी लिया है। पेड़ कटते देखकर मुझे भी अच्छा नहीं लग रहा, लेकिन रायगढ़ में जगह के अभाव के चलते ऐसा करना पड़ रहा है- एके दीवान, ईईए पीडब्ल्यूडी, रायगढ़