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प्रदर्शन कर मांगा पीने के लिए पानी

आक्रोशित लोग पेयजल मुहैया कराने के लिए सड़कों पर उतर आए हैं। तारानग में नहरबंदी के कारण कस्बे सहित तहसील के ग्रामीण क्षेत्रों में लोग पानी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हो गए हैं।

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अंचल में इन दिनों नहरबंदी के कारण कई जगह पेयजल संकट गहरा गया है। आक्रोशित लोग पेयजल मुहैया कराने के लिए सड़कों पर उतर आए हैं।
तारानग में नहरबंदी के कारण कस्बे सहित तहसील के ग्रामीण क्षेत्रों में लोग पानी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हो गए हैं।

पेयजल किल्लत से जूझ रहे लोगों ने गुरुवार को एसडीएम कार्यालय के सामने प्रदर्शन कर पीने के लिए पर्याप्त पानी मुहैया कराने की मांग की।
प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना था कि नहरबंदी के कारण लोग पानी के लिए दर-दर भटक रहे हैं।

पेयजल को लेकर गांवों में स्थिति बदतर होती जा रही। भीषण गर्मी में लोगों को दूर-दराज से पानी लाकर काम चलाना पड़ रहा है। सरकार की ओर से गांवों में कोई इंतजाम नहीं किए जाने से लोग 1000 से 1500 रुपए तक देकर टैंकरों से पानी मंगवा रहे हैं। क्षेत्र में नहर के अलावा पेयजल का कोई अन्य स्रोत नहीं है।

इसके बावजूद नहर विभाग ने नहरबंदी का समय और बढ़ाकर लोगों को प्यासे मरने पर मजबूर कर दिया है। करीब आधे घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद लोगों ने एसडीएम को ज्ञापन देकर नहरबंदी समाप्त कर क्षेत्र में पेयजल की उचित व्यवस्था करने व समस्याग्रस्त गांवों में टैंकरों से जलापूर्ति करवाने की मांग की।

समस्या का शीघ्र समाधान नहीं होने पर प्रदर्शन उग्र करने की चेतावनी दी। जनक्रांति मंच के जिलाध्यक्ष हरिसिंह बेनीवाल के नेतृत्व में प्रदर्शन करने वालों में पार्षद सोमवती बेनीवाल, कमला बेनीवाल, निर्मल प्रजापत, उमराव सहारण, मुकेश फगेडिय़ा, संदीप सेन, दिनेश स्वामी, देवीलाल, सलामु लुहार व आजम आदि शामिल थे।

बुचावास में भी गहराया पेयजल संकट

गांव बुचावास में गहराए पेयजल संकट से गांव के लोग पानी के लिए दर-दर भटक रहे हैं। आठ दिनों से तो गांव में पानी की सप्लाई नहीं होने से लोग सुबह से शाम तक पानी के जुगाड़ में सार्वजनिक कुंडों व बोरिंग के पास खड़े इंतजार करने को मजबूर हैं।

गांव के राजकीय बालिका उप्रावि स्थित कुंड पर पानी भरने के लिए लोगों की भीड़ लगी रहती है। पानी के लिए लोगों को घंटों कतार में खड़े रहना पड़ रहा है।गांव में कई लोगों ने घरों में बोरिंग खुदवा रखा है। मगर पानी खारा होने से वह पीने लायक नहीं है। इस पानी से पशु भी बीमार हो रहे हैं।

लोग 1000 से 1500 रुपए में पानी के टैंकर खरीद रहे हैं। गांव में 50 पीएसपी स्टैंड है। मगर कई दिनों तक पानी नहीं आने से स्टैंड पर मटकों की कतार लगी रहती है।

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