
कांग्रेसियों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
रायगढ़. शौचालय घोटाले पर पड़ा पर्दा उठने का नाम नहीं ले रहा है। इस मामले में जिस प्रकार की स्थिति बनी हुई है उससे तो यह आरोप लग रहा है कि जिला प्रशासन इसकी जांच के नाम पर आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रहा है।
इस बात को लेकर कांग्रेस अब हल्ला बोलने की तैयारी में है। कांग्रेसियों ने कलक्टर के नाम ज्ञापन सौंपते हुए १५ दिन के भीतर जांच रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने की मांग की है। जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं किए जाने की स्थिति में चेतावनी भी दी है और कहा है कि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होने पर प्रशासन व सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
स्वच्छता अभियान के तहत शहरी क्षेत्र में नगर निगम के द्वारा करीब सात हजार शौचालय बनाने का दावा किया गया है, लेकिन इस आंकड़ों के अधिकांश शौचालय कागजों पर ही बना दिए गए। इस बात का खुलासा नगर निगम के टीम की जांच में सामने आ चुकी है। कागजों में बनाए गए शौचालयों को लेकर निगम में खूब हंगामा हुआ।
इस हंगामे को लेकर नगर निगम की सामान्य सभा में जांच टीम बनाई गई। इस टीम में जनप्रतिनिधियों के अलावा तकनीकी अधिकारियों को भी शामिल किया गया। जांच के दौरान अधिकांश शौचालयों का फर्जी तरीके से निर्माण होना पाया गया। इसकी रिपोर्ट भी निगम अधिकारियों को सौंपी जा चुकी है।
निगम के द्वारा इस मामले पर किसी प्रकार से कार्रवाई होती, इससे पहले ही जिला प्रशासन ने इस मामले की जांच के लिए एक टीम गठित कर दी। इस टीम की कमान जिला पंचायत सीईओ चंदन त्रिपाठी को सौंपा गया। यह टीम जिला प्रशासन के द्वारा ७ माह पहले बनाई गई, लेकिन अब तक जांच के नाम पर खानापूर्ति ही की जा रही है।
ऐसे में यह आरोप लगने लगा है कि इस मामले में सत्तापक्ष के चहेते फंस रहे हैं इसलिए जिला प्रशासन के अधिकारी ही शौचालय निर्माण में गड़बड़ी करने वाले लोगों को बचाने का प्रयास कर रहा है।
इसकी वजह से अब तक जांच नहीं हो सकी। इस बात को लेकर कांग्रेसियों ने बुधवार को कलक्टर को ज्ञापन सौंपा है। इसमें शौचालय घोटाले की जांच रिपोर्ट सावर्जनिक किए जाने की मांग की गई है।
वहीं ज्ञापन में स्पष्ट कहा गया है कि यदि जिला प्रशासन १५ दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट को सावर्जनिक नहीं करता है तो कांग्रेस इसके विरोध में प्रदर्शन करेगी। ज्ञापन सौंपने के दौरान कांग्रेस पार्षद दल के नेता शाखा यादव, पूर्व कांग्रेस शहर अध्यक्ष नगेंद्र नेगी, दीपक पांडेय, अशरफ खान, पूर्व महापौर जेठूराम मनहर सहित अन्य कांग्रेसी मौजूद थे।
सात माह में सात वार्डों की भी नहीं हुई जांच
शौचालय घोटाले को लेकर नगर निगम में हुए हंगामे और शहर में हुई जोरशोर से चर्चा के बाद जिला प्रशासन ने इस मामले में हस्तक्षेप किया। वहीं जांच टीम बनाई, लेकिन यह जांच टीम महज दिखावे के लिए बनाई गई। स्थिति यह है कि सात माह पहले टीम बनाई जा चुकी है, लेकिन अब तक सात वार्डों की भी जांच पूरी नहीं हो सकी है। इस बात को लेकर भी नाराजगी है।
घोटालेबाजों को बचाने हो रहा प्रयास
शौचालय घोटाले पर नजर डाले तो शहरी क्षेत्र में जितने भी ठेकेदार शौचालय बनाने का काम किए हैं, उसमें से अधिकांश ठेकेदार भाजपा से जुड़े हुए हैं। ऐसे में यह भी माना जा रहा है कि सत्ताधारी दल के दबाव की वजह से जिला प्रशासन इस घोटाले की जांच में ज्यादा रूचि नहीं ले रहा है। इसकी वजह से इस जांच को लंबा खींचा जा रहा है।
-सात माह पहले जिला प्रशासन के द्वारा टीम बनाई गई है। इस टीम को अब तक जांच पूरा कर लेना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका है। इस मामले को लेकर कलक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा गया है। १५ दिन के भीतर जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं किया जाता तो प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया जाएगा।
-शाखा यादव, कांग्रेस पार्षद दल नेता
Published on:
11 Jul 2018 07:38 pm
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