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इसी गति से चलता रहा काम तो कुपोषण मिटाने में लग जाएंगे पूरे 15 साल

4800 बच्चों के मध्यम व गंभीर रूप से कुपोषित होने का खुलासा

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4800 बच्चों के मध्यम व गंभीर रूप से कुपोषित होने का खुलासा

4800 बच्चों के मध्यम व गंभीर रूप से कुपोषित होने का खुलासा

रायगढ़. जिले में कुपोषण को लेकर पिछले कई साल से चलायी जा रही शासकीय योजनाओं के बावजूद 4800 बच्चों के मध्यम व गंभीर रूप से कुपोषित होने का खुलासा हुआ।

वजन त्योहार में जब यह आंकड़ा सामने आया तो विभाग की नींद उड़ गई। ऐसे में नवा जनत व बाल संदर्भ योजना के जरिए 4800 बच्चों को सुपोषण दूत व मित्र समूह को गोद देकर उन्हें कुपोषित से सुपोषित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। जिसका नतीजा यह हुआ कि 6 साल मेंं जिले के कुपोषण की दर में करीब 13 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है पर अभी भी जिले में कुपोषण की दर 27.70 है।

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उचित खान-पान व देखभाल के अभाव में जिले के बच्चे तेजी से कुपोषित होते हैं। ये हम नहीं खुद सरकारी आंकड़े कह रहे हैं। वर्तमान में कुपोषण के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान मेंं पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है।

इसके बाद भी रायगढ़ जिले में कुपोषण की वर्तमान दर 27.70 है। विभाग के अनुसार राहत की बात यह है कि साल दर साल कुपोषण की दर में गिरावट दर्ज की गई है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2012-13 में जहां कुपोषण की दर 40.39 प्रतिशत थी। जो वर्ष 2017-18 में 27.70 दर्ज की गई है।


विभागीय आंकड़ों मेंं 6 साल के बीच करीब 13 प्रतिशत की आई इस गिरावट की पीछे का प्रमुख वजह वजन त्यौहार को बताया जा रहा है। जिसमें 4800 कुपोषित बच्चों का रिकार्ड सामने आया। मध्यम व गंभीर रूप से कुपोषित इन बच्चों का रिकार्ड देख पर विभागीय अधिकारियों की नींद भी उड़ गई। जिसके बाद नवा जतन व बाल संदर्भ योजना के तहत इसकी भरपाई करने की पहल की गई। बाल संंदर्भ योजना के तहत उक्त बच्चों को इलाज की व्यवस्था भी की गई।


अब दर पर नजर
विभाग की ओर से भले ही नाक बचाने के लिए छह साल का आंकड़ा एक साथ पेश किया जा रहा है ताकि आंकड़े दहाई अंक में दिखें। पर यदि साल दर साल के आंकड़े को देखें तो अधिकतम पांच प्रतिशत से ज्यादा इनके कामयाबी की दर नहीं है। कभी तीन प्रतिशत, कभी चार प्रतिशत तो कभी गिरावट की दर एक ्रप्रतिशत के आंकड़े को भी नहीं छू सकी है।


उठ रहे हैं सवाल
महिला बाल विकास विभाग के आंकड़ों में कुपोषण की दर में साल दर साल कमी दर्ज की गई है। पर सबसे अधिक चौकाने वाले आंकड़े वर्ष 2017-18 के हैं। जिसमें .(दशमलव)22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। जो पिछले एक दशक के कुपोषण के आंकड़ों में सबसे कम गिरावट को बयां करता है। ऐसे में, वर्ष 2017-18 में कुपोषण के खिलाफ लड़ी गई जंग पर सवाल उठना स्वभाविक है।


4800 कुपोषित बच्चों को दिया गोद
वजन त्योहार में 4800 कुपोषित बच्चों के सामने आए रिकार्ड के बाद नवा जतन के जरिए उक्त बच्चों की जिम्मेदारी, सुपोषण दूत व मित्र समूह को दी गई। करीब 6 माह तक उक्त कुपोषित बच्चों को सुपोषित करने की कवायद की गई। जिसके बाद कुपोषण की दर में साल दर साल गिरावट दर्ज की गई। पर अभी भी जिले में कुपोषण की दर 27.70 है। जो एक गंभीर समस्या बन कर विभाग के लिए किसी चुनौति से कम नहीं है।


27.70 प्रतिशत पर मुख्यमंत्री सुपोषण मिशन
जिले में कुपोषण की वर्तमान दर 27.70 है। जिसे कम करने विभागीय अधिकारी अब मुख्यमंत्री सुपोषण मिशन की बात कह रहे हैं। उनकी माने तो मुख्यमंत्री सुपोषण मिशन योजना की औपचारिक घोषणा कर दी गई है। अब इस पर काम करने की कवायद की जाएगी। जिससे जिले के इस मौजूदा आंकड़े को कम करने की कवायद की जाएगी।