
विभाग में संचालित आठ योजनाओं के आडिट में उजागर हुई अनियमिताएं, कार्रवाई फिर भी शून्य
रायगढ़. जिले का स्वास्थ्य महकमा लोगों की तकलीफों को कम अनियमिताओं को लेकर इन दिनों ज्यादा चर्चा में है। स्थिति यह है कि इस विभाग में लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी आठ योजनाएं संचालित है। इन योजनाओं के लिए शासन राशि आबंटित करती है। इस प्रत्येक योजनाओं में जमकर वित्तीय अनियमिता की गई है। इस बात का खुलासा आडिट रिपोर्ट में हो चुका है। खरीदी में विभाग के द्वारा छत्तीसगढ़ भंडारण क्रय अधिनियम का पालन नहीं करते हुए अनियमिता की गई है।
इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी मान रहे हैं कि कुछ गबड़बडिय़ां हुई है, लेकिन वे खुल कर बोलने के लिए तैयार नहीं हैं। प्रशासन के द्वारा स्वास्थ्य विभाग में आठ योजनाएं संचालित की जाती है। इसमें शिशु व मातृत्व के लिए अलग योजना है तो राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, टीकाकरण, महतारी योजना, मलेरिया, कुष्ठ, क्षय के अलावा शहरी स्वास्थ्य योजना है। इन योजनाओं को संचालित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग को हर साल राशि आवंटित की जाती है।
बीते वित्तीय वर्ष में विभाग के द्वारा शिशु व मातृत्व योजना के लिए ७३ लाख ५८ हजार ५५२ रुपए खर्च किया जाना बताया गया है। वहीं इसकी जानकारी शासन को भी भेजी गई है। यह राशि फरवरी तक खर्च किया गया है। खास बात यह है कि इसमें विभाग के पास ७० लाख ७५ हजार १३४ रुपए का बिल वाउचर तो है, लेकिन २ लाख ८३ हजार ४१८ रुपए का कोई हिसाब नहीं है, जो आर्थिक अनियमिता की श्रेणी में आता है।
इसी तरह की गड़बड़ी राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजना में भी की गई है। फरवरी तक १९ लाख १७ हजार ५५२ खर्च किए जाने की जानकारी उच्चाधिकारियों को दी गई, लेकिन इसमें भी हजारों रुपए खर्च की गई राशि का कोई भी बिल वाउचर नहीं है। इसमें भी जमकर अनियमिताएं की गई। इसके अलावा टीकाकरण योजना में भी २१ लाख ९१ हजार ९९८ रुपए खर्च किया जाना बताया गया है, लेकिन ७८ हजार १४० रुपए को कोई हिसाब नहीं है। वहीं विभाग के द्वारा कुष्ठ रोग के लिए भी योजना संचालित किया जाता है। फरवरी माह तक इस विभाग में ५ लाख ३० हजार ४६ रुपए खर्च किया जाना बताया गया है। आडिट के दौरान ४ लाख ६१ हजार रुपए का बिल वाउचर तो मिला, लेकिन ६८ हजार ५५ रुपए का कोई हिसाब नहीं है। इसी तरह क्षय रोग व शहरी स्वास्थ्य मिशन योजना के तहत भी व्यापक आर्थिक अनियमिताएं की गई है।
नियम का पालन नहीं
स्वास्थ्य विभाग को या चाहे कोई और विभाग को सामान खरीदी के लिए छत्तीसगढ़ भंडार क्रय अधिनियम २००२ का पालन किया जाता है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के द्वारा इन विभागों में सामान व दवा खरीदी के लिए भंडार क्रय नियम का पालन नहीं किया गया। इसमें एक लाख रुपए से अधिक की खरीदी पर टेंडर किया जाता है। जिसकी प्रक्रिया में टेंडर की विधिवत सूचना प्रकाशित की जाती है। वहीं कम दर वाले फर्म से सामान खरीदी की जाती है, लेकिन विभाग ने टेंडर की बजाए कोटेशन मंगाया और बेधड़क आगे की प्रक्रिया पूर्ण कर ली।
एक ही फर्म के बार-बार आए कोटेशन
बीते फरवरी में विभाग का आडिट कराया गया। इस आडिट के दौरान आडिटरों को यह जानकारी लगी की विभिन्न मदों में किए गए राशि के जहां बिल वाउचर नहीं है। वहीं खरीदी के लिए भंडार क्रय नियम का पालन भी नहीं करते हुए कोटेशन मंगाया गया। वहीं कोटेशन जो मंगाए गए थे, उसमें भी एक ही फर्म से बार-बार कोटेशन मंगाए गए थे। जिसमें फर्म के नाम के साथ प्रोप्राइटर का मोबाइल नंबर एक ही है, जो सीधे-सीधे अर्थिक अनियमिता का इशारा कर रही है।
पहले भी एक बार हो चुकी है जांच
स्वास्थ्य विभाग में हो रही इस गड़बड़ी की जानकारी उच्चाधिकारियों को है। वहीं इस गड़बड़ी को लेकर एक माह पूर्व ही रायपुर से स्वास्थ्य विभाग की टीम जांच के लिए यहां पहुंची थी। वहीं विभाग शाखाओं में जांच की। इस दौरान व्यापक पैमाने पर आर्थिक अनियमिताएं भी सामने आई। जांच के बाद इसका रिपोर्ट तैयार करते हुए टीम ने इसकी रिपोर्ट अपने उच्चाधिकारियों को सौंप दी है।
-खरीदी में कुछ प्रक्रियाओं का पालन नहीं किए जाने की जानकारी मिली है, लेकिन तत्कालीन परिस्थिति क्या थी। इस पर भी निर्भर करता है। हालांकि यह पूरा मामला मेरे कार्यकाल का नहीं है, वहीं अब तक इस विषय के निराकरण की जानकारी भी मुझ तक नहीं पहुंची है- टीके टोंडर, प्रभारी, सीएमएचओ
Published on:
12 Jul 2018 12:45 pm
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