
मंदिर सहित घर-घर में हुआ कन्या भोज का आयोजन
रायगढ़. चैत्र नवरात्रि के नवमें दिन देवी मंदिरों सहित भक्तों ने अपने घर पर कन्या भोज का आयोजन किया, इस दौरान विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना के बाद कन्याओं को भोजन कराया गया और उनसे आर्शीवाद भी लिया। वहीं मान्यता है कि नवरात्र के अंतिम दिन माता स्वरूपा कन्याओं की पूजा-अर्चना कर उन्हें भोजन कराने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती है। जिसके चलते रविवार को घर-घर में माता के भक्तों ने कन्या भोज का आयोजन किया था, साथ ही देवी मंदिरों में महाभंडारा का आयोजन किया गया था, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त पहुंच कर प्रसाद ग्रहण किया।
गौरतलब हो कि नवरात्र के अंतिम दिन रविवार को शहर सहित अंचल के देवी मंदिरों में कन्याभोज व महाभंडारे का आयोजन किया गया था। जिसके लिए सभी तैयारियां पहले से की गई थी। ऐसे में विगत दो सालों से सभी आयोजन बंद होने से इस बार भक्तों की बड़ी संख्या में उपस्थित रही, जिससे मंदिर समिति द्वारा महाभंडारा में भारी मात्रा में प्रसाद तैयार कराया गया था, साथ ही जगह-जगह कन्या भोज का भी आयेाजन किया गया था, जहां सुबह से ही लोग कन्याओं को अपने घर पर बुलाकर पहले उनके पांव पखारे फिर आदर पूर्वक उनको भोजन कराया गया, वहीं मान्यता है कि नवरात्र के नौ दिनों तक कन्याओं में माता का स्वरूप देखा जाता है। इसी परंपरा के अनुसार नवरात्र के अंतिम दिन कन्या भोज कराया जाता है। साथ ही नौ दिनों तक माता का व्रत रखने वाले भक्त कन्या भेाज के बाद अपना व्रत तोड़ा। हालांकि विगत दो साल से कोरोना काल होने के कारण महाभंडारे सहित अन्य कार्यक्रमों पर बैन था, लेकिन अब स्थिति सामान्य होने के बाद इस बार सभी जगह धूमधाम से आयोजन किया गया।
क्यों होता है कन्या पूजन
मान्यता है कि हिंदू धर्म में छोटी बच्चियों को देवी दुर्गा का अवतार माना जाता है। दुर्गा अष्टमी व महा नवमी पर उनकी पूजा की जाती है। मान्यताओं के अनुसार भगवान से प्रार्थना करने की तुलना में कन्याओं से करने पर शीघ्र मनोकामनाएं पूर्ण होती है। जिससे संसार में बच्चों को सबसे शुद्ध रूप माना गया है। इस लिए शुद्ध आत्मा के रूप में कन्या पूजा की जाती हैं।
सुबह से ही मंदिर पहुंचने लगे थे भक्त
चैत्र नवरात्र के अंतिम दिन रविवार को शहर सहित अंचल के देवी मंदिरों में सुबह से ही भक्तों का जत्था पहुंचने लगा था, इस दौरान मानकेश्वरी मंदिर, चंद्रपुर स्थित चंद्रहासिनी माता, नाथलदाई, तराईमाल स्थित मां बंजारी मंदिर सहित शहर के बुढ़ी माई मंदिर, अनाथालय स्थित दुर्गा मंदिर, केवड़ाबाड़ी बस स्टैंड सहित दर्गा मंदिरों सहित अन्य मंदिरों मे सुबह से ही भक्तों का तांता लग गया था, जो देर शाम तक भक्त अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए मन्नतें मांगते देखे गए।
मंदिरों में भी हुआ कन्या भोज
रविवार सुबह से ही पूरा वातावरण भक्तीमय नजर आ रहा था, इस दौरान लोग ही कन्याओं के भेाजन कराने की तैयारी में जुट गए थे, साथ ही शहर के देवी मंदिरों में यह आयोजन धूम-धाम से किया गया। साथ ही कन्याओं को मां दुर्गा का रूप मानकर उनका सबसे पहले पांव पखारा गया फिर आदर पूर्वक भोजन कराने के बाद उनको उपहार स्वरूप श्रृंगार का सामान सहित रुपए देकर उनका विदाई किया गया।
Published on:
10 Apr 2022 08:44 pm
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