
रायगढ़. हाल के दिनों में प्रदेश सरकार की ओर से महरा जाति को एससी में शामिल किया गया है, पर इस फैसले से बजाए खुश होने के महरा समाज के लोग सरकार पर भडक़ गए हैं। उनका कहना है कि हम मूलत: आदिवासी है और हमें अनुसूचित जाति में शामिल कर दिया गया है। समाज के लोगों का कहना है कि सरकार अपने इस कदम से हमारी संस्कृति, हमारा मान-सम्मान, हमारी पहचान को खत्म करना चाहती है।
इस मामले को लेकर जिले के कुड़ुमकेला में एक विशाल बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में लगभग डेढ़ से दो हजार लोग इस समाज के शामिल हुए। समाज में लोगों ने कहा कि हमारे पास प्रमाण है कि हम आदिवासी हैं इसके बाद भी हमे अनुसूचित जाति में शामिल किया जा रहा है।
समाज के लोगों ने 1949 के दस्तावेज का हवाला देते हुए कहा कि इसमें हमें आदिवासी बताया गया है, कुछ साल पहले इसे विलोपित कर दिया गया था, इसके दस साल तक हमारा जाति प्रमाणपत्र नहीं बन रहा था जब आंदोलन और संघर्ष किया गया तो हमें रिजर्व कोटे में तो डाला गया पर हमारी पहचान की खत्म करने की कोशिश हो रही है। समाज के लोगों का कहना है कि हमें अनुसूचित जाति में शामिल करके सरकार हमारा मान-सम्मान खत्म कर रही है। हालंाकि किस प्रकार उनका सम्मान खत्म हो रहा है इस बात को वो खुलकर नहीं बोल रहे हैं।
महरा समाज की बैठक कुड़ुमकेला के अघोर आश्रम में संपन्न किया गया। इस बैठक में रायगढ़ जिले के साथ ही कोरबा से भी महरा समाज के लोग उपस्थित हुए थे। इस बैठक में मुख्य मुद्दों पर चर्चा की गई, जिसमें एक तो दुर्ग में होने वाला धरना प्रदर्शन की तैयारी पर बात हुई, दूसरी सरकार की ओर से महरा जाति को एससी में शामिल करने से सभी के मन में आक्रोश था उसे प्रकट किया गया।
ये बताया कारण
समाज के लोगों का कहना है कि वो मूलरूप से छत्तीसगढ़ी हैं और वस्त्र बनाने का कार्य करते हैं। उनका कहना है कि पूरे प्रदेश में उनकी आबादी लगभग नौ लाख है इसमें बस्तर में ही छह लाख की आबादी है। सरकार ने महाराष्ट्र से आए म्हार जाति के लोगों की तर्ज पर उन्हें एससी केटेगरी में डाल दिया है, यह गलत है।
किसी भी हद तक जाएंगे अधिकार के लिए
इस बैठक में समाज के लोगों ने यह स्पष्ट किया कि वो अपने जाति के अधिकार के लिए किसी भी हद तक गुजर जाएंगे। जिला अध्यक्ष राघव झरिया ने सभी से एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए लडऩे की बात कही।
यहां से आए लोग
इस बैठक में कड़मकेला, रायगढ़, छाल, तरकेकेला, धरमजयगढ़, कुदुमुरा, घरघोड़ा, कोरबा, सरिया, रेडा, जोबी, जब्गा सहित अन्य जगहों से लोग पहुंचे थे। जबकि प्रमुख रूप से रामअवतार वस्त्रकार, लोकेश्वर झरिया, खुलेश्वर झरिया, सोनू, सतीश कमल, बनमारी झरिया, जगे सिंह, पितांबर, तरुण, मोहीलेश सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
Published on:
25 Dec 2017 01:08 pm
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