
रायगढ़. जिले के प्रायवेट स्कूलों पर न तो विभाग का लगाम है और न ही शासन का, यही कारण है कि विभाग के अधिकारी स्कूलों के मनमाने फीस को लेकर मौन साधे हुए हैं। जबकि देखा जाए तो अन्य मामलों में शिकायत पर नोटिस जारी कर कार्रवाई की जाती है, पर इस मामले में खामोशी है। हैरानी तो इस बात की भी है कि पूरे साल भर छात्र हित का दंभ भरने वाले छात्र संगठन भी इस मुद्दे को लेकर नदारद हैं।
जिले के प्रायवेट स्कूलों में इन दिनों नए शिक्षण सत्र के लिए एडमिशन का दौर चल रहा है एडमिशन के दौरान प्रायवेट स्कूल जहां अभिभावकों को शिक्षण सामग्री के नाम पर विवश कर चुके हैं वहीं स्कूलों में एडमिशन फीस के नाम पर भी जमकर मनमानी हो रही है। आश्चर्य की बात तो यह है कि शिक्षा विभाग के अलावा प्रशासन व शासन भी इस बात से अनजान नहीं है इसके बाद भी आज पर्यंत न तो फीस नियामक बोर्ड का गठन हो पाया और न ही प्रायवेट स्कूलों में फीस के नियंत्रण को लेकर अन्य कोई पहल की गई है।
इसके कारण हर साल हजारों की संख्या में अभिभावक परेशान हो रहे हैं या यूं कहें कि लूटे जा रहे हैं। कॉलेजों में परीक्षा के समय फार्म को लेकर या फिर अन्य समय में छात्र हित में आंदोलन करने का दावा करने वाले संगठन इस मुद्दे को लेकर अब तक मौन साधे हुए हैं जबकि राजधानी में उपभोक्ता संघ ने सीएम से मिलकर बकायदा इसके लिए ज्ञापन सौंपकर प्रायवेट स्कूलों के मनमाने फीस पर नियंत्रण के लिए नियामक बोर्ड गठन करने की मांग की है।
बस इतना है अंतर
अधिकांश प्रायवेट स्कूलों में देखा जाए तो न्यू एडमिशन और रीएडमिशन फीस में कुछ प्रतिशत का ही अंतर है। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि जब बच्चा किसी स्कूल में पांच साल से पढ़ रहा है तो छठवें साल या फिर दूसरे साल फिर से एडमिशन क्यों कराएं। अधिकारी भले ही इसे नीतिगत रूप से गलत बता रहे हैं लेकिन जब कार्रवाई की बात को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं।
बात करने से कतरा रहे हैं अधिकारी
इस मामले शिक्षा सचिव से चर्चा करने का प्रयास किया गया तो पता चला कि तात्कालीन सचिव रिलीव हो गए हैं और नए ने ज्वायनिंग नहीं की है। इसको लेकर अवर सचिव एनआर कपाली से चर्चा की गई तो संयुक्त सचिव से चर्चा करने कहा गया। जब संयुक्त सचिव पीके भटनागर से चर्चा की गई तो इस बारे में कुछ भी बात करने से मना कर दिया।
-प्रायवेट स्कूलों को लेकर फीस नियामक बोर्ड का गठन नहीं होने से अभिभावक ठगे जा रहे हैं। यह गलत है। इसको लेकर छात्र संगठन जल्द ही आंदोलन करेंगे। और फीस नियामक बोर्ड का गठन करने मांग की जाएगी- आरीफ हुसैन, अध्यक्ष एनएसयूआई
Published on:
16 Apr 2018 01:08 pm
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