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खाते में करोड़ों रुपए होने के बावजूद, आखिर क्यों विकास के प्रस्ताव को नहीं मिल रही अनुमति, पढि़ए खबर…

गौण खनिज उत्खनन करने के एवज में जमा होने वाले रायल्टी का राशि प्रभावित क्षेत्र के विकास कार्य में लगना रहता है।

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खाते में करोड़ों रुपए होने के बावजूद, आखिर क्यों विकास के प्रस्ताव को नहीं मिल रही अनुमति, पढि़ए खबर...

रायगढ़. जिला पंचायत की सामान्य सभा की बैठक में एक बात सामने आई जिसमें यह कहा गया कि गौण खनिज मद के कार्यों की मानिटरिंग जिला पंचायत के हाथ में आए। अब सवाल यह उठ रहा है कि हाल में ही जिस प्रकार से जिला विकास निधि के वितरण में मनमानी और पक्षपात की गई है उसके बाद अब गौण खनिज मद की भी कमान जिला पंचायत के सदस्य अपने हाथ में चाहते हैं।

हलांकि यह बात भी सही है कि जिले में कई ग्राम पंचायत ऐसे हैं जहां विकास कार्य के लिए राशि नहीं है वहीं गौण खनिज उत्खनन से प्रभावित ग्राम पंचायतों के खाते में करोड़ों रुपए हैं, लेकिन ग्राम पंचायत उसे खर्च नहीं कर पा रही है। इसके पीछे का कारण यह बताया जा रहा है कि पूर्व में इस मद की राशि को लेकर हुई अनियमितता के कारण अब जो विकास के प्रस्ताव बन रहे हैं उसमें अनुमति नहीं मिल पा रही है।

पहले इस मसले का तो हो जाए समाधान
जिला पंचायत में विकास निधि के रूप में आए 2 करोड़ की राशि का प्रस्ताव के हिसाब से स्वीकति दी गई जिसमें कई क्षेत्रों में एक रुपए नहीं मिला, जिसके कारण उक्त क्षेत्र के जनप्रतिनिधि आबंटन के इस व्यवस्था के लेकर विरोध करने की बात कह रहे हैं, ऐसे में जब तक इस निधि में पारदर्शिता नहीं आती है तब तक समुचित विकास फिलहाल संभव नहीं दिख रहा है।

यहां पर यह है स्थिति
सारंगढ़ जनपद पंचायत में गुड़ेली, टीमरलगा सहित आधा दर्जन ग्राम पंचायत में देखा जाए तो 28 लाख रुपए से 6 करोड़ रुपए तक की राशि ग्राम पंचायतों के खाते में जमा है उक्त राशि गौण खनिज मद से मिले रायल्टी का उपकर है जो प्रभावित क्षेत्र के विकास कार्य में लगना है लेकिन उक्त ग्राम पंचायतों में विकास कार्य के प्रस्ताव ही तैयार नहीं हो पा रहे हैं। जिससे इनको स्वीकृति मिले और राशि से विकास कार्य हो। कुछ प्रस्ताव उक्त क्षेत्र से आए हैं जो कि पूर्व में किए गए अनियमितता के कारण संदेह पर रोक दिया गया है जिसमें जांच कराकर प्रस्ताव को अनुमति जारी करने की बात कही जा रही है।

चर्चा तो इसकी भी है
गौण खनिज मद की राशि का फिर से बंदरबाट करने की तैयारी चल रही है। सूत्रों की माने तो कुछ जनप्रतिनिधि संबंधित क्षेत्र के ग्राम पंचायतों में जाकर सरपंच सचिव से उक्त के राशि को खर्च करने के प्रस्ताव पर जिला प्रशासन से अनुमति दिलाने के एवज में सांठ-गांठ करने चर्चा चला रहे हैं। शनिवार को समान्य सभा में भी एकाएक ये मामला उठाया गया।

क्या है नियम
गौण खनिज उत्खनन करने के एवज में जमा होने वाले रायल्टी का राशि प्रभावित क्षेत्र के विकास कार्य में लगना रहता है। जिस क्षेत्र में 50 लाख से अधिक का रायल्टी जमा होता है उस क्षेत्र में उपकर का 50 प्रतिशत राशि खनिज विभाग सीधे गा्रम पंचायत में और 50 प्रतिशत राशि जनपद के खाते में जमा कराती है। इससे कम रायल्टी पर निर्धारित रेसियों के हिसाब से राशि आबंटन होता है। इसके बाद ग्राम पंचायत व जनप प्रस्ताव तैयार कर अनुमोदन करते हुए जिला पंचायत के माध्यम से कलक्टर को पुटअप करते हैं जिसमें कलक्टर की अनुमति के बाद वर्क आर्डर जारी होता है।

- जनपदों में गौण खनिज मद के प्रभावित क्षेत्र के प्रस्ताव को अनुमोदित नहीं किया जा रहा है। बल्कि इसे अन्य क्षेत्र में खर्च किया जा रहा है। इसलिए इसे जिला पंचायत से मॉनिटरींग करने की बात समान्य सभा में रखी गई- अजेश अग्रवाल, अध्यक्ष जिला पंचायत

-इस मद की राशि सीधे ग्राम पंचायत के खाते में जाता है। कुछ प्रतिशत जनपद को मिलता है जिससे प्रभावित क्षेत्र के ७ किलोमीटर परीधि के गांवों में ही खर्च किया जाता है। जिपं अध्यक्ष का आरोप गलत है। पूर्व में हुए अनियमितता के कारण कार्य लटके हैं- उत्तरी जांगड़े, अध्यक्ष जनपद पंचायत