
निगम द्वारा अभी तक नहीं लगाया जा सका प्लास्टिक रिसाइक्लिंग प्लांट
रायगढ़. प्लास्टिक से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए जिले में विगत कई माह पहले रिसाइक्लिंग प्लांट लगाने की योजना बनी थी, लेकिन अभी तक यह योजना धरातल पर नहीं उतर सका है। वहीं एनटीजी के नियमों के तहत विगत जुलाई माह से शहर में सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक लगाया गया है, लेकिन इसके बाद भी कहीं न कहीं इसका उपयोग हो ही रहा है, जिसके चलते यत्र-तत्र प्लास्टिक फैलने के कारण प्रदूषण के फैलाव में कुछ खास कमी होता नजर नहीं आ रहा है।
गौरतलब हो कि प्लास्टिक रीसाइकलिंग प्लांट स्थापित करने की योजना निगम द्वारा कई माह पहले ही बनाई गई थी, लेकिन यह योजना भी अब सफेद हाथी साबित होते नजर आ रहा है। क्योंकि नगर निगम इसके लिए स्थल चयन से लेकर लगभग सभी तैयारी पहले से की गई थी, लेकिन इसके बाद भी प्लांट लगाने की प्रक्रिया टेंडर तक ही सीमित होकर रह गई है। जिसके चलते जहां एक तरफ प्लास्टिक बैन किया गया है, वहीं दूसरी प्लास्टिक की छंटाई कर डंप हो रहा है, लेकिन इसका रिसाइक्लिंग नहीं होने के कारण यत्र-तत्र फैलते नजर आ रहा है। जिसके चलते प्लास्टिक से होने वाले प्रदूषण में कुछ खास कमी होते नजर नहीं आ रहा है। वहीं प्लास्टिक का उपयोग कई सारे कार्यों में होता है। सिंगल-यूज प्लास्टिक की लत और जरूरत से ज्यादा निर्भरता की वजह से पर्यावरण पर उसका गंभीर दुष्परिणाम हुआ है। वहीं शासन के कड़े निर्देशों के बाद नगर निगम द्वारा शहर में सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग करने वाले दुकानदारों पर जुर्माना भी लगाया जा रहा है, लेकिन इसके बाद भी पूरी तरह से बंद होते नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में प्लास्टिक एक ऐसा समाग्री बन गया है कि कहीं न कहीं उपयोग हो रहा है, वहीं प्लास्टिक ऐसा सामाग्री है जो आसानी से गलते नहीं हैं। एक छोटी-सी प्लास्टिक की थैली का डिस्पोज होने में लगभग दो दशक का समय लग जाता है, जिसके चलते शहर के कचरा कलेक्शन घरों में बड़ी मात्रा में कचरा एकत्र हो चुका है।
दो बार जारी हो चुका टेंडर
निगम सूत्रों की मानें तो दो बार टेंडर के लिए निविदा निकाली गई है, लेकिन अभी तक प्लांट लगाने कोई सामने नहीं आ पाया है। वहीं बताया जा रहा है कि विगत कई माह से प्लास्टिक का उपयोग बंद करने लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है, जिसे देखते हुए आगामी भविष्य में प्लास्टिक बंद होने की उम्मीद है। जिसके चलते रीसाइकलिंग प्लांट के टेंडर लेने कोई सामने नहीं आ रहा है।
खर्च ज्यादा, स्वीकृति राशि कम
जानकारों की मानें तो डीएमएफ फंड से रीसाइक्लिंग प्लांट के लिए 36 लाख 37 हजार रुपए स्वीकृत है, लेकिन रीसाइक्लिंग प्लांट लगाने लगाने में लगभग 50 लाख से भी अधिक खर्च होने की बात सामने आ रही है। जिसके चलते कोई टेंडर लेने के लिए राजी नहीं हो रहा है। ऐसे में अगर यही स्थिति रही तो एक तरफ सरकार प्लास्टिक बैन करती रहेगी और दूसरी तरफ इसका उपयोग होता रहेगा, जिससे प्लास्टिक प्रदूषण कम होने के बजाय निरंतर बढ़ता ही रहेगा।
कम दाम में प्लास्टिक बेचने की मजबूरी
इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार जिले में प्लास्टिक रीसाइक्लिंग प्लांट नहीं होने के कारण शहर से निकलने वाले प्लास्टिक को स्वच्छता दीदी द्वारा कलेक्ट कर छंटाई किया जाता है, जिसको सीमेंट कंपनी या कबाड़ में बेचा जा रहा है, लेकिन ज्यादा मांग नहीं होने के कारण रेट कम मिल रहा है जिसके चलते इसे एकत्र करने में भी ज्यादा रूचि नहीं दिखा रहे हैं।
जवाब देने से बच रहे अधिकारी
प्लास्टिक रिसाइक्लिंग प्लंाट क्यों नहीं लग पा रहा है इस संबंध में जब निगम आयुक्त संबित मिश्रा से बात करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन रिसिब नहीं किया।
Published on:
14 Oct 2022 08:39 pm
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