
झोलाछाप डॉक्टर के इलाज से प्रसूता की मौत, मामला रफा-दफा करने की तैयारी
रायगढ़. एक गर्भवती महिला की डिलीवरी के समय झोलाछाप डाक्टर द्वारा डिलीवरी कराने के दौरान उसकी मौत हो गई। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा भी जांच की गई है, लेकिन अभी तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं होने से संदेह के दायरे में आ रहा है। भूपदेवपुर थाना क्षेत्र से लगभग दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित दर्री गांव में रहने वाले संतोष डनसेना नाम के व्यक्ति द्वारा बिलासपुर गांव में मरीजों के ईलाज के लिए एक क्लीनिक का संचालन किया जाता है।
इसी क्लिनिक में बीते 13 अक्टूबर को गांव की गर्भवती रूकमणी बाई पति नरेश चौहान 25 साल जांच के लिए पहुंची थी। जिसके कुछ समय बाद डॉक्टर द्वारा प्रसव की व्यवस्था की गई। जिसमें घर पर ही महिला ने एक बच्ची को जन्म दिया, लेकिन प्रसव के बाद महिला को अधिक रक्तस्त्राव होने से उसकी डेढ़ घंटे बाद मौत हो गई। वहीं इस मामले में जब डाक्टर से बात किया गया तो उनका कहना था कि मैंने मरीज के परिजन को रायगढ़ ले जाने के लिए कहा था, लेकिन एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं होने से समय पर नहीं पहुंच पाए और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई।
डॉक्टर ने बचाव के लिए लिखवाया पत्र
मामले में खुद को फंसता देख अवैध क्लिनिक चला रहे डा. संतोष डनसेना द्वारा खुद से एक पत्र लिखकर मृतका के पति से उस पर हस्ताक्षर करा लिया, जिसमें यह जिक्र किया गया था कि प्रसुता की मौत में उसकी कोई गलती नहीं है, मौत का कारण परिवार के लोग खुद हैं। गांव के लोगों ने बताया कि डॉक्टर और पीडि़त परिवार को इस मामले में चुप रहने की हिदायत दी गई है।
स्वास्थ्य विभाग से अनुमति का दावा
गांव में अवैध रूप से चल रहे क्लिनिक को लेकर जब संतोष डनसेना से बात की गई तो उनका कहना था कि जिला स्वास्थ्य विभाग से इसके लिए उन्होंने स्वीकृति ली हुई है। खुद को पैरामेडिकल प्रशिक्षित डॉक्टर बताने वाले संतोष डनसेना का कहना है प्राथमिक उपचार कर सकते हैं। अगर उनकी बात को सही माना भी जाए तो यहां मामला एक प्रसुता की मौत से जुड़ा है, जो उनके क्षेत्र का हिस्सा नहीं है।
बीएमओ को अब तक नहीं मिली जांच रिपोर्ट
भूपदेवपुर क्षेत्र चपले बीएमओ का हिस्सा है। बताया गया दो सप्ताह पहले हुए इस घटना के बारे में विभाग को जानकारी है। खुद एक आरएमओ इसकी जांच के लिए पहुंचे थे, लेकिन आरएमओ ने क्या जांच की, इसकी रिपोर्टिंग अब तक बीएमओ को नहीं दी गई है। अब विभाग की भूमिका संदिग्ध होता देख बीएमओ खुद जांच करने की बात कर रहे हैं। विभाग के अधिकारियों के शह पर अब भी क्लिनिक का संचालन किया जा रहा है, यह स्थिति तब है जब मैटरनल डैथ पर मॉनिटरिंग करने के लिए खुद स्वास्थ्य सचिव ने दस दिन पहले प्रदेश स्तर पर बैठक आयोजित की थी।
सीधी बात- डॉ संतोष डनसेना, भूपदेवपुर
प्र. रूकमणि बाई की मौत कैसे हुई।
उ. घर में डिलवरी कराए थे, मैंने बोला था कि अब इसको अस्पताल ले जाओ, लेकिन समय पर अस्पताल नहीं पहुंचने से मौत हो गई।
प्र. जानकारी मिली है कि आपने इसका इलाज किया है।
उ. मेरे को इलाज के लिए बुलाए थे, उस समय उसको अधिक रक्तस्त्राव के कारण उसको कमजोरी लग रही थी तो मैंने अस्पताल भेजने की सलाह दी थी।
प्र. आप गांव में कैसे क्लिनिक चला रहे हैं
उ. मैंने इसके लिए रायगढ़ सीएचएमओ आफिस में मलेरिया विभाग में चार साल ट्रेनिंग ली है, पूर्व सीएचएमओ के कहने पर मैंने क्लिनिक चला रहा हूं।
प्र. परिजनों का आरोप है कि आपके इलाज से इसकी मौत हुई है
उ. लोग दस तरह की बात करते हैं। मैंने देखा है और इसको अस्पताल ले जाने की सलाह दी है इस दौरान देर होने के कारण अस्पताल पहुंचने से पहले ही इसकी मौत हो गई।
-बिलासपुर की घटना में हमारे यहां से आरएमओ जांच के लिए गए थे, लेकिन अभी तक उन्होंने इस बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं दी है। जहां तक क्लीनिक के संचालन का सवाल है तो उसके लिए किसी प्रकार की स्वीकृति दिए जाने की बात बिल्कुल गलत है। जांच के बाद सही पाने जाने पर कार्रवाई की जाएगी- डॉ. एसके ठाकुर, बीएमओ, चपले
Updated on:
26 Oct 2018 12:46 pm
Published on:
26 Oct 2018 12:43 pm
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