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खेती-किसानी का काम बंद, बावजूद मनरेगा को नहीं मिल रहे मजदूर, इतने हजार मजदूर हुए कम

15 जून से 15 अक्टूबर तक आम तौर पर निर्माण कार्यों पर रोक लग जाती है लेकिन अब मॉनसून का ब्रेक खत्म हो गया है।

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कोरबा

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Shiv Singh

Oct 26, 2018

खेती-किसानी का काम बंद, बावजूद मनरेगा को नहीं मिल रहे मजदूर, इतने हजार मजदूर हुए कम

खेती-किसानी का काम बंद, बावजूद मनरेगा को नहीं मिल रहे मजदूर, इतने हजार मजदूर हुए कम

कोरबा. मनरेगा के लिए मजदूर नहीं मिल पा रहे हैं, जबकि खेती-किसानी का दौर लगभग खत्म होने पर है। त्योहारी और चुनावी सीजन होने की वजह से मजदूर परिवारों की संख्या २७ हजार से सीधे ९ हजार में पहुंच गई है। मनरेगा में काम की रफ्तार जितनी शुरुआती महीनों में पड़ी। वित्तिय वर्ष समाप्त होते-होते अब इसकी गति मंद पडऩे लगी है। अप्रैल से शुरू हुए चालू वित्तीय वर्ष में शुरू के तिमाही में लगभग २१ हजार से २७ हजार अधिक मजदूर काम कर रहे थे।

लेकिन इसके बाद बरसाती सीजन आते ही जहां खेती किसानी का दौर शुरू हुआ वैसे ही मजदूर की संख्या कम होने लगी। जून से लेकर अक्टूबर तक खेती किसानी का दौर माना जाता है। इस सीजन में हर साल मजदूरों की संख्या बहुत कम हो जाती है। इसके अलावा १५ जून से १५ अक्टूबर तक आम तौर पर निर्माण कार्यों पर रोक लग जाती है लेकिन अब मॉनसून का ब्रेक खत्म हो गया है।

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अक्टूबर का अंतिम सप्ताह चल रहा है। ऐसे में मजदूरों की संख्या ९ हजार जा पहुंची है। अधिकारियों के मुताबिक ग्रामीण अंचलों में त्योहारी सीजन होने की वजह से संख्या हर बार कम होती है। चुनावी माहौल होने की भी मजदूरों की संख्या नहीं बढ़ रही है।

मजदूरी भुगतान भी बड़ी वजह
मनरेगा में मजदूरों को समय पर मजदूरी नहीं मिलना भी संख्या में इजाफा नहीं होने का एक बड़ी वजह है। कई बड़े ग्राम पंचायत में पिछले दो तीन वर्षो का भी बकाया हुआ है। कई बार मांग व शिकायत के बाद भी इन मजदूरों को भुगतान नहीं हो सका है। सरपंच व सचिवों की भी इसमें शिकायत हो चुकी है। इस वजह से मजदूर ठेकेदारों के अंदर काम कर रहे हैं ताकि समय पर मजदूरी मिल सकें।

किस ब्लॉक में कितने लोगों को सौ दिन का मिला रोजगार
ब्लॉक - मजदूर परिवार
करतला 12
कटघोरा 5
कोरबा 8
पाली 34
पोड़ी उपरोड़ा 15

-त्योहारी के सीजन आते ही मजदूरों की संख्या कुछ कम हो जाती है। नवंबर के बाद इसमें गति आएगी- संदीप डिक्सेना, एपीओ, मनरेगा