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मजबूर मरीजों को लूट रहे हैं जिला अस्पताल में

जिला अस्पताल में इन दिनों इलाज के लिए आने वाले मरीजों को डाक्टर प्रायवेट लैब की पर्ची थमा कर बाहर से जांच कराने का निर्देश दे रहे हैं। बकायदा मरीजों को यह कहा जा रहा है कि यदि सही इलाज चाहिए तो निजी लैब में टेस्ट करवाओ।

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Piyushkant Chaturvedi

Jul 13, 2016

District Hospital

Patients are forced to loot District Hospital

रायगढ़.
जिला अस्पताल में इन दिनों इलाज के लिए आने वाले मरीजों को डाक्टर प्रायवेट लैब की पर्ची थमा कर बाहर से जांच कराने का निर्देश दे रहे हैं। उनका कहना है कि जिला अस्पताल में हो रही सोनोग्राफी की रिपोर्ट सहीं नहीं आ रही है। बकायदा मरीजों को यह कहा जा रहा है कि यदि सही इलाज चाहिए तो निजी लैब में टेस्ट करवाओ। यह दूसरा मामला है जब जिला अस्पताल में किए जा रहे रिपोर्ट या फिर मरीजों को रिपोर्ट के लिए प्रायवेट लैब में भेजने की बात सामने आ रही है। इससे पहले एक नर्स ने जिला अस्पताल के ब्लड रिपोर्ट को मानने से मना कर दिया था।


मेडिकल कालेज संबद्ध जिला अस्पताल में अव्यवस्था थमने का नाम नहीं ले रहा है। कभी परिजनों के सामान की चोरी हो जाती है तो कभी बच्चे की चोरी हो जाती है। पिछले दिनों एक डाक्टर द्वारा मरीजों की पर्ची पर नो-गारंटी का सील लगाया जा रहा था। मंगलवार को तमनार क्षेत्र के ग्राम टिहलीरामपुर-उदयपुर निवासी मीना कुमारी पटेल पिता विपिन पटेल 35 वर्ष इलाज के लिए जिला अस्पताल आई थी। जिसे चेकअप के बाद एक डाक्टर ने उसे सोनोग्राफी कराने की नसीहत दी और एक निजी डायग्नोस्टिक सेंटर की पर्ची काट कर थमा दी।


इस संंबंध में विपिन पटेल ने डाक्टर से कहा कि अगर हमारे पास पैसे होते तो अपनी बेटी का इलाज कराने के लिए जिला अस्पताल क्यो लेकर आते। मैं अपनी बेटी का इलाज तमनार स्वास्थ्य केंद्र में करा रहा था, लेकिन वहां व्यवस्था नहीं होने के कारण से जिला अस्पताल रिफर किया गया है। यहां जब डाक्टर से उसका जांच कराया गया तो डाक्टर द्वारा ये बोला गया कि अपनी बेटी का सही जांच कराना चाहते हो तो अस्पताल में सोनोग्राफी मत कराओ और निजी डायग्नोस्टिक सेंटर का पर्ची काटकर उसे थमा दी गई। जिस पर मरीज के परिजन और डाक्टर से काफी बहस होने के बाद डाक्टर ने जवाब दिया कि जिला अस्पताल के सोनोग्राफी की रिपोर्ट सही नहीं आती है इस कारण प्रायवेट डायग्नोस्टिक सेंटर की पर्ची दी जा रही है।


सबकी टेबल पर है पर्ची
सरकारी अस्पताल में किस प्रकार से निजी को फायदा पहुंचाया जा रहा है और मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाया जा रहा है। इस बात का प्रमाण इससे मिलता है कि अधिकांश डाक्टर की टेबल पर निजी लैब, पैथोलॉजी और रेडियोलाजिस्ट की पर्ची रखी हुई मिल जाती है। जिसको जहां भेजना होता है उसे उस लैब, सेंटर की पर्ची काटकर थमा दी जाती है। बकायदा ओपीडी में ही मौजूद डाक्टर की टेबल पर तीन निजी सेंटरों की पर्ची नाम व पते के साथ उपलब्ध थी।


अस्पताल में नहीं हो पा रही है सोनोग्राफी

इस संंबंध में जब अस्पताल स्थित स्नोग्राफी सेंटर में जाकर बात की गई तो वहां मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि सोनोग्राफी मशीन तो है लेकिन यहां रेडियोलाजिस्ट नहीं है। इस कारण बाहर से एक रेडियोलाजिस्ट को एक घंटे के लिए बुलाया जाता है। जो उसके समय पर आ जाता है उसकी सोनोग्राफी हो जाती है बाकि को बाहर जाना पड़ता है।


मजबूर मरीजों से लूट

जिला अस्पताल में सोनोग्राफी कराने पर मरीज को सिर्फ 250 रुपए की पर्ची कटानी पड़ती है। लेकिन वहीं सोनोग्राफी किसी निजी डायग्नोस्टिक सेंटर से कराया जाता है तो 500 से 550 रुपए तक लिए जाते हैं। इस कारण मरीजों पर दोहरा भार पड़ रहा है।


चल रहा कमीशन का खेल

लोगों का कहना है कि डाक्टर द्वारा जिस भी लैब व पैथोलाजी की पर्ची दी जाती है। उसमें डाक्टर का नाम और मोबाइल नंबर अंकित होता है। जिससे डायग्नोस्टिक सेंटर संचालक द्वारा डाक्टरों को प्रत्येक पर्ची पर 100 रुपए से लेकर 150 रुपए तक का कमशीन देते हैं। इस कारण डाक्टर मरीजों को बाहर जांच के लिए भेज देते हैंं।


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कहते हैं अधिकारी

डाक्टरों की गलती है, इस मामले में मैं डाक्टरों को नोटिस जारी करुंगा। खुद जाकर सभी टेबल की जांच करुंगा। अस्पताल की रिपोर्ट हमेशा सही आती है।

एसके मोहंती, अस्पताल अधीक्षक

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