
जहां श्री राम ने बुझाई थी माता सीता की प्यास, वहां पहुंचे लोगों ने कहा- इससे अच्छी सुबह और हो ही नहीं सकती
रायगढ़. राम के नाम पर स्थित रामझरना में सुबह से ही रौनक देखी गई तो वहीं दूसरी ओर शहर में धूमधाम से ईद मिलादुन्नबी मनाई गई। रामझरना के विषय में ऐसी मान्यता है कि वनवास काल में भगवान श्री राम माता जानकी व लक्ष्मण इस मार्ग से भ्रमण किए थे। इस बीच जब माता सीता को प्यास लगी तो राम ने एक तीर जमीन पर चलाया। जहां से पानी के फव्वारे निकला। यह जलकुंड आज भी राम झरना में स्थित है जो लोगों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है।
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अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से शहरवासियों को एक नया सवेरा मिला। हमारा शहर शुरू से ही आपसी भाईचारा के रूप में जाना जाता है। इस शहर में हर धर्म के लोग निवास करते हैं और उनमें आपसी प्यार झलकता है। आम दिनों में शहर से दूर भूपदेवपुर स्थित राम झरना में लोग घूमने, पिकनिक मनाने आते हैं। खासकर आमला नवमीं और कार्तिक पूर्णिमा में यहां खासी भीड़ रहती है, लेकिन अयोध्या मामले के फैसले की पहली सुबह रविवार को जब पत्रिका की टीम राम झरना पहुंची तो वहां लोगों की खासी भीड़ देखी गई, जबकि इस दिन कोई पर्व नहीं था।
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ऐसे में वहां उपस्थित लोगों की प्रतिक्रिया ली गई तो उन्होंने बताया कि अयोध्या मामले में फैसला आने के बाद दोनों ही समुदाय के लोग काफी खुश हैं। रविवार को मुसलमान भाई धूमधाम से ईद मना कर खुशियां बांट रहे हैं। वहीं हम भी राम के स्थान में आकर स्वच्छ वातावरण में एक अलग ही खुशी का अनुभव कर रहे हैं। इससे अच्छी सुबह और हो ही नहीं सकती।
क्या है मान्यता
राम झरना की यह मान्यता है कि जब राम भगवान और सीता माता वनवास पर थे इस दौरान वे भूपदेवपुर पहुंचे। जहां सीता माता को जोर की प्यास लगी तो भगवान राम ने जमीन पर तीर चलाया। जिससे वहां एक कुंड बन गया और उससे पानी की धार निकलने लगी। उसी पानी की धार से सीता माता ने अपनी प्यास बुझाई। तब से लेकर आज तक उस कुंड से पानी बह रहा है और इसी वजह से उक्त स्थान को राम के नाम से राम झरना दिया गया। आज राम झरना वन विभाग के अंडर में है और उसे पर्यटन स्थल की दृष्टि से काफी विकसित कर दिया गया है।
Updated on:
10 Nov 2019 06:04 pm
Published on:
10 Nov 2019 05:23 pm

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