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सिंघनपुर का अब तक नहीं हुआ उद्धार 20, लाख की लागत से किया जाना है सौंदर्यीकरण

इस पुरातत्विक स्थल का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा

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इस पुरातत्विक स्थल का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा

इस पुरातत्विक स्थल का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा

रायगढ़. शहर से महज बीस किमी की दूरी पर सिंघनपुर गुफा है। यहां वर्षों पुराने शैलाश्रय हैं, लेकिन प्रशासन की अनदेखी के कारण इस पुरातत्विक स्थल का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। करीब आठ माह पूर्व सिंघनपुर गुफा के सौंदर्यीकरण के लिए २० लाख रुपए स्वीकृत भी किए गए, लेकिन विडबंना है कि अब तक इसके सौंदर्यीकरण का कार्य शुरू नहीं किया गया है। ऐसे में सिंघनपुर गुफा तक पर्यटक पहुंच नहीं पा रहे हैं।


सिंघनपुर गुफा में कई पुराने शैलाश्रय हैं और यहां ११ गुफा हैं। इस ऐतिहासिक पुरातत्वि स्थल की पूरे प्रदेश में पहचान है। पूर्व में यहां व्यवस्थित पहुंच मार्ग था, लेकिन धीरे-धीरे इसकी हालत खराब हो गई। इसमें सुधार करने के बजाए विभागीय अधिकारी लापरवाही बरते रहे। ऐसे में इसकी हालत बद से बदतर हो गई है। मौजूदा समय में यहां तक पहुंच पाने के लिए रास्ता ही नहीं है और ना ही पर्यटकों की सुविधा का कोई यहां इंतजाम है।

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विभागीय अधिकारियों की माने तो इस पुरातात्विक स्थल के महत्व को देखते हुए इसके सौंदर्यीकरण के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया। वही इस प्रस्ताव में २० लाख रुपए खर्च करते हुए जीर्णोद्धार किया जाना था। यह कार्य जिला पंचायत के द्वारा करवाया जाना था, लेकिन फाइल जाकर जिला पंचायत में दब गई। यह कार्य नहीं होने की स्थिति में वन विभाग के अधिकारियों ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया। इससे न तो सिंघनपुर शैलाश्रय का जीर्णोद्धार हो सका और ना ही सिंघनपुर पहुंचने के लिए सड़क का जीर्र्णोद्धार करवाया जा सका है।

न चौकीदार न गाइड
सिंघनपुर गुफा को व्यवस्थित करने के लिए पहले भी अधिकारियों ने दावे किए, लेकिन हर बार सिर्फ दावे कर इसे भूला दिया जाता है। ऐसे में यहां के शैलाश्रय भी अब धीरे-धीरे मिटते जा रहे हैं। यही नहीं पूर्व में यहां एक गाइड भी हुआ करता था, जो पर्यटको को यहां तक पहुंचाता था, लेकिन अब यहां न चौकीदार है और न ही कोई गाइड है।

-सौंदर्यीकरण के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। जैसे ही स्वीकृति मिलती है, निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
-आरसी यादव, रेंजर, वन विभाग रायगढ़