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प्रभावित ग्राम से ३० किलोमीटर दूर करा रहा सुनील स्पंज लोक सुनवाई

जिला प्रशासन भी नियम कानून को ताक पर रखे

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प्रभावित ग्राम से ३० किलोमीटर दूर करा रहा सुनील स्पंज लोक सुनवाई

जिला प्रशासन भी नियम कानून को ताक पर रखे

रायगढ़। सुनील स्पंज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा नियम कानून को ताक पर रखकर पर्यावरणीय क्लीयरेंस लेने के फिराक में दिख रहा है और इसमें जिला प्रशासन का संरक्षण मिल रहा है। प्रभावित क्षेत्र से करीब २५-३० किलोमीटर दूर लोक सुनवाई स्थल तय किया गया है।
ग्राम सराईपाली स्थित सुनील स्पंज प्राइवेट लिमिटेड की लोक सुनवाई का स्थल बंजारी चुना गया है जबकि देखा जाए ते उक्त परियोजना से प्रभावित ग्रामों से लोकसुनवाई स्थल काफी दूर है। किसी भी उद्योग वविस्तार हो या फिर खदान के लिए पर्यावरणीय क्लीयरेंस लेने के लिए लोक सुनवाई का आयोजन किया जाता है। नियमानुसार देखा जाए तो परियोजना प्रस्तावित स्थल या फिर प्रभावित क्षेत्रों से करीब १० किलोमीटर की परिधी में लोकसुनवाई का आयोजन किए जाने का प्रावधान है ताकि प्रभावित सभी आसानी से वहां तक पहुंचकर अपनी बातें रख सके, लेकिन सुनील स्पंज ने लोकसुनवाई स्थल ऐसा तय किया है जो कि परियोजना प्रभावित के अंतिम छोर से करीब २०-३० किलोमीटर दूर पड़ रहा है। यह सिर्फ इसलिए किया जा रहा है ताकि इस दौरान प्रभवित क्षेत्र के लोग समय पर नहीं पहुंचे सके अैर अपनी बातें न रख पाएं। इसके पीछे कारण यह बताया जा रहा है कि उक्त परियोजना अर्थात सुनील स्पंज के विस्तार को लेकर क्ष्ेत्र के लोग सहमे हुए हैं और पर्यावरण प्रदूषित होने की बात कही जा रही है। इसके अलावा ग्रामीणों ने नियम कायदों को ताक पर रखकर लोकसुनवाई कराने का आरोप लगया है जिसमें जिला प्रशाासन व संबंधित अधिकारियों का संरक्षण मिलने की बात कही जा रही है।
इआईए रिपोर्ट से हाथी भी गायब
वैसे तो जानकारों की माने तो पूर्व में सुनील स्पंज की स्थापना के दौरान लोकसुनवाई का आयोजन वहीं आस पास के खेल व स्कूल मैदान में किया गया था, लेकिन विस्तार के लिए लोकसुनवाई का आयोजन १० किलोमीटर की परीधि से बाहर किया जा रहा है, इसको लेकर तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं।
कई गुना का हो रहा विस्तार
सुनील स्पंज प्राइवेट लिमिटेड की क्षमता वर्तमान में 29.700 एमटी प्रति वर्ष है विस्तार के बाद यह 2 लाख 11 हजार मीट्रिक टन का क्षमता प्रति वर्ष हो जाएगा। एक बार में ही ७० हजार गुना का विस्तार करने के लिए उद्योग प्रबंधन लगा हुआ है और प्रशासन भी उद्योग प्रबंधन के रिपोर्ट पर सवाल उठाने के बजाए मौन है।
वर्सन
इआईए रिपोर्ट का अध्यन करने के बाद लोग अपनी बातों को रखे यही कारण है कि लोकसनुवाई का आयोजन होता है। इआईए रिपोर्ट में व्याप्त खामियों को लेकर अगर कोई लिखीत में शिकायत करें या लोकसुनवाई में रखे तो उनकी बातें उच्च कार्यालय तक पहुंचाई जाएगी।
अंकुर साहू, जिला पर्यावरण अधिकारी