
शहर की जीवनदायिनी केलो नदी सूखने के कगार पर
रायगढ़. गर्मी शुरू होते ही जिले की जीवनदायिनी केलो नदी सूखने के कगार पर पहुंच रही है। इसमें शहर के नालियों का पानी आने से केलो नदी नाले के रूप में तब्दील होते जा रहा है, इसके बाद भी सैकड़ों लोग केलो नदी के पानी पर आश्रित है। यह नदी दिन प्रतिदिन प्रदूषण की चपेट में आकर दूषित हो रहा है। इसके बाद भी नदी को संरक्षरण करने कोई उपाय नहीं होने से आने वाले दिनों में अस्तित्व ही खत्म हो सकता है।
केलो नदी पर शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्र के आबादी भी निर्भर करती है। वर्तमान में इस नदी में फेक्ट्रियों से लेकर शहर के नालियों से निकलने वाला गंदा पानी नदी में ही प्रवाहित हो रहा है। इस कारण नदी का पानी दुषित हो रहा है। इससे जल जनित बीमारी फैलने का भी खतरा बढ़ रहा है। हालांकि वर्तमान समय में केलो नदी का पानी लोगों के घरों में नलों के माध्यम से फिल्टर प्लांट में रिफाइनरी कर पहुंचाया जाता है। इसके बावजूद धुंधला पानी की शिकायत आ रही है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि केलो नदी का पानी कितना दूषित हो चुका है। इस नदी को साफ और स्वच्छ बनाने के लिए जिला प्रशासन व निगम द्वारा कई योजना तैयार किए गए, लेकिन कोई भी योजना अभी तक धरातल पर नहीं उतर सका है। हालांकि विगत दो वर्ष पहले केलो नदी को सहेजने से लेकर स्वच्छ बनाने की कवायद प्रसाशनिक स्तर में हो रही है। जिसमें वाटर ट्रीटमेंट प्लांट भी शामिल है, लेकिन घरों से निकलने वाले पानी समाहित होने के कारण दिन ब दिन स्थिति दैयनिय होती जा रही है।
नाले के रूप में हो रहा तब्दील
शहर के कुछ बुजुर्गो का मानना है कि लगभग २5-30 वर्ष पहले केलो नदी में हर मौसम में भरपूर पानी रहता था। इस नदी में सिंचाई परियोजना के तहत नदी में बांध बनवाया गया। जिसके बाद से ही नदी में जलस्तर धीरे-धीरे घटना लगा ऐसा कहा जा सकता है कि अब केलो नदी सिचाई के लिए नहर बन गई है। जिसमे पानी केलो बांध परियोजना के अनुसार छोडा जाता है। इस कारण नदी हमेशा सूखी रह रही है।
बीमारी फैलने का खतरा
जानकारों की मानें तो बांध से पानी नहीं छोड़े जाने के कारण नदी फिलहाल सूख रही है। इस समय सिर्फ शहर के नालियों का पानी ही है, इसके बाद भी हर दिन सैकड़ों लोग इस पानी को निस्तारी के रूप में उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में बीमारी फैलने का खतरा अधिक बढ़ गया है। पहले नाली के पानी के साथ बांध का भी पानी आता था, इस कारण गंदगी नदी से बह जाती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है। ऐसे में प्रशासन को इसके लिए ठोस कमदम उठाने की जरूरत है, तभी कुछ हो पाएगा।
समाजसेवियों को सामने आने की जरूरत
अब केलो नदी को सहेजने के लिए समाजसेवियों को सामने आने की आवश्यकता है, तभी इसका कुछ पाएगा। साथ ही घरों से निकलने वाले गंदा पानी को नदी के बजाय कहीं और निकाला जाए और डेम से गर्मी के मौसम में पानी छोड़ा जाएगा तभी नदी का अस्त्वि बच सकेगा, हालांकि इसके लिए शहरवासियों की जरूरत है तभी कुछ हो सकेगा।
Published on:
26 Mar 2022 08:42 pm
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