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पुलिस इस तरह करती है गोलमाल, जो होता है वो दिखाता नहीं और जो नहीं होता दिखता है वही

वहीं एसपी जांच कर कार्रवाई का दावा करते हैं

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वहीं एसपी जांच कर कार्रवाई का दावा करते हैं

वहीं एसपी जांच कर कार्रवाई का दावा करते हैं

रायगढ़. रायगढ़ पुलिस करती कुछ है और दिखाती कुछ है। यह तरीका जिला मुख्यालय में जमकर फलफूल रहा है। ऐसा करके पुलिस जहां अपनी जेबें भर रही है, वहीं एसपी जांच कर कार्रवाई का दावा करते हैं, लेकिन सभी दावे सिर्फ हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। कुछ दिन पहले कोतवाली पुलिस और क्राईमब्रांच की टीम ने मिलकर लाखों का कोरेक्स जब्त करने के मामले में लंबा खेल करने की कोशिश की थी।

लगभग २० दिन बीत गए, लेकिन एसपी दीपक झा मामले की जांच ही कर रहे हैं और शनिवार को फिर से कोतवाली पुलिस की दोहरे चरित्र वाली कार्रवाई सामने आ गई है। कोतवाली पुलिस इन दिनों दो गाडिय़ों का चालान का पैसा लेकर रसीद सिर्फ एक ही काट रही है। इससे एक रसीद का पैसा तो शासन के खाते में जा रहा है, लेकिन दूसरी रसीद जो नहीं काटी गई उसका पैसा सीधे अधिकारी की जेब में जा रहा है।


यह सारा नाजारा शनिवार शाम ४.४५ मिनट पर रेलवे स्टेशन के सामने मारवाड़ी पंचायती धर्मशाला के पास हुआ। हुआ यूं कि यहां सकरी सड़क होने के बाद भी सड़क किनारे चार लोग अपना आटो खड़ा किए हुए थे। इसी दौरान कोतवाली पुलिस की गाड़ी वहां पहुंची और उसमें एक सिपाही उतरकर चारों आटो चालकों से उनकी चाबी छीन लिया। इसके बाद पुलिस की गाड़ी चौकी के सामने खड़ी हुई।

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चारो आटो चालक हांथ जोड़े उनके पास पहुंचे। गाड़ी पर बैठे एएसआई ने चार आटो चालकों में सभी से दो-दो सौ रुपए लिए और इसमें दो को तो दो-दो सौ रुपए की रसीद दी, लेकिन दो लोगों को रसीद भी नहीं दिया। इससे साफ है कि एएसआई ने एक झटके में शासन के खाते में चार सौ रुपए तो बढ़ा दिए, लेकिन चार सौ रुपए अपनी जेब में डाल लिए। पुलिस की यह दोहरी कार्रवाई लोगों में चर्चा का विषय है। पुलिस का यह काम रोज का हो गया है।


एक रसीद लगी पत्रिका के हाथ
यह सारा खेल पत्रिका की टीम भी चुपचाप देखती रही। जैसे ही चार लोगों में से दो की रसीद काटकर पुलिस की गाड़ी कोतवाली की तरफ गई तो पत्रिका ने एक आटो चालक को बुलाकर पूछा इस पर उसने रसीद दिखाते हुए बताया कि चार में दो लोगों की रसीद काटकर उन्हें भगा दिया गया है। काटी गई रसीद का नंबर ए ७५०२९ था, जो कि मनोज कुमार गिरी के नाम से काटी गई और उसमें थाना प्रभारी सिटी कोतवाली के हस्ताक्षर थे। रसीद को काटा तो एएसआई ने लेकिन उसमें साइन कोतवाली टीआई के हैं। जबकि सही मायने में जो अधिकारी रसीद काटता है उसकी के हस्ताक्षर होने चाहिए।